कोटेशन्स
सत्य

जन्म असत्य है। मृत्यु भी असत्य है। सत्य तो जीवन के इन दो विरोधाभासी छोरों को मिलाने वाला तत्व है। जिस रोज आप उसे पहचान लेंगे उस दिन के बाद आप जब, जो और जितना चाहेंगे...मिलेगा।

-दीप त्रिवेदी

यदि आपको बुद्ध, जीसस, कृष्ण या किसी भी बड़े Philosophers की बात को समझना है तो, उनकी कही बातों में दो भेद करने का ज्ञान होना आवश्यक है। एक ‘सनातन-सत्य’ व दूसरा ‘समय का सत्य’। इन दोनों में भेद किये बगैर आप उनकी सारी बातों का उलटा अर्थ ही निकालेंगे।

-दीप त्रिवेदी

‘‘सत्य’’ पल-पल नया व रूपांतरणीय है। अतः हजारों वर्ष पूर्व कही बातें उस वक्त के ‘‘समय, संजोग व परिस्थितियों’’ को देखकर सही हो सकती हैं, पर वे सब आज के भी सत्य हों, कतई जरूरी नहीं।

-दीप त्रिवेदी

‘‘सत्य’’ शारीरिक तौर पर किया कर्म या भावना में बह के किये कर्म का नाम नहीं। सत्य उस कर्म से आये परिणाम का नाम है। किसी ने यदि आपमें सुधार लाने को गाली दी तो उसने गाली दी ही कहां? ...उसने तो आप में सुधार लाने की चेष्टा की।

-दीप त्रिवेदी

सत्य सदैव से है व रहेगा। क्योंकि सत्य विश्व की सारी विरोधाभासी शक्तियों व भावों के बीच के सेतु का नाम है। शक्तियां व भावों में दोनों ओर कितने ही उतार-चढ़ाव आ जाएं, सत्य स्थिर ही रहता है।

-दीप त्रिवेदी

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