कोटेशन्स
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इतिहास में ऐसा कोई मनुष्य ज्ञात नहीं जिसके जाने के बाद मनुष्य की प्रगति रुक गयी हो। यानी हमारी चेतना का रोज-रोज विकास हो रहा है। फिर क्यों हम आज भी हजारों वर्ष पूर्व पैदा हुए मनुष्यों के आसरे जी रहे हैं?

-दीप त्रिवेदी

मनुष्य जन्म लिया है तो कर्म करना एकमात्र ‘‘पूजा’’ है, और कर्तव्य-कर्म निभाना एक मात्र ‘‘ध्यान’’ है। अलग से पूजा या ध्यान वे लोग करते हैं जो कर्मों से विमुख हो चुके हैं।

-दीप त्रिवेदी

इस विश्व की सबसे बड़ी समस्या वे पांच करोड़ के करीब पंडित, मौलवी, पादरी, मठाधीश या अन्य धर्म के साधु हैं जो धर्म के नाम पर बिना कुछ किये दूसरों के भरोसे जी रहे हैं। यदि उनसे जबरन खेती भी करवा ली जाए तो मैं वादा करता हूँ कि पूरे विश्व में अनाज के भाव रातों-रात आधे हो जाएंगे।

-दीप त्रिवेदी

आप सिर्फ हफ्ताभर अपने मन में उठ रही तरंगों, आसपास घट रही घटनाओं व प्रकृति की हलचलों को ध्यान से निहारो। आपको समझ आ जाएगा कि आपकी झूठी आशाओं व आपके खोटे डरों को छोड़कर ‘‘ईश्वर’’ की जरूरत किसी को नहीं।

-दीप त्रिवेदी

समय के सिर्फ एक स्वरूप यानी ‘वर्तमान’ से प्रकाशित इस जगत में कैसे एक पल से ज्यादा बटोरने की कोशिश में लगा कोई व्यक्ति कभी भी सफल हो सकता है?

-दीप त्रिवेदी

मनुष्य का उसके स्वभाव के अलावा कोई शत्रु नहीं।

-दीप त्रिवेदी

प्रकृति का मनुष्य के जीवन में कोई Interference नहीं। प्रकृति की ओर से वह पूर्णरूपेण स्वतंत्र है। इस लिहाज से अपने सुख-दुःख का जिम्मेदार मनुष्य स्वयं नहीं तो और कौन है?

-दीप त्रिवेदी

विकट परिस्थितियों से जूझने का एक ही सिद्धांत है। ...जो कर सकते हैं - हाथोंहाथ करें, उपाय खत्म होते ही इन्तजार करें...और इन्तजार के बाद भी कोई नया उपाय न सूझे तो उसे स्वीकार कर आगे की सोचें।

-दीप त्रिवेदी

हिंदू शास्त्रों में 33 करोड़ के करीब देवी-देवता वर्णित हैं। आज की जनसंख्या के आधार पर भी यह तीन मनुष्य पर एक देवता हुए। फिर भी देश की हालत देखने पर वे कहीं और व्यस्त लगते हैं। ...लगता है अब हमें उनके भरोसे रहने के बजाय देश के उद्धार हेतु स्वयं लगना होगा।

-दीप त्रिवेदी

मनुष्य के लिए उसके अपने जीवन हेतु सबसे ज्यादा कीमती समय, शक्ति व धन है। धार्मिक क्रियाएं इन तीनों का जमकर शोषण करती हैं।

-दीप त्रिवेदी

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