कोटेशन्स
चाह

जीवन के सारे दुःखों की जड़ चाह है। चाह नजर बाहर घुमाने से पैदा होती है। यानी जिसकी नजर सिर्फ अपने पर बनी हुई हो वह कभी दुःखी नहीं होता।

-दीप त्रिवेदी

‘‘चाह’’ की एक खूबी है। आप जो चाहेंगे वह आपको कभी नहीं मिलेगा। विश्वास नहीं होता तो अपने जीवन में झांक के देख लो। आप पायेंगे कि आपने जो चाहा मिला नहीं व जो मिला वह चाहा नहीं।

-दीप त्रिवेदी

आप अपनी कमजोर ‘‘दूरदृष्टि’’ पर गौर तो करें; जिन चीजों को प्राप्त करने हेतु आप इतना उत्साह दिखाते हैं, चन्द दिनों में ही वह आपको कांटों की तरह चुभना प्रारंभ कर देती है।

-दीप त्रिवेदी

इस जगत में चाह से परिणाम आ जाते होते तो - तो किसी की चाह में कोई कमी नहीं।

-दीप त्रिवेदी

सफल जीवन वह है, जिसके मन में मृत्यु के समय कोई ‘चाह’ नहीं रह जाती।

-दीप त्रिवेदी

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