जो भी परिणामकारी ज्ञान है वह मनुष्य के भीतर मन की गहराइयों में ही छिपा पड़ा है। यही कारण है कि मोजार्ट की धुनें हो या उमर खय्याम की रुबाइयां, कृष्ण की भगवद्गीता हो या आईन्स्टाइन का दुनिया बदलकर रख देने वाला सिद्धांत E=mc2; सब भीतर से बाहर निकली चीजें ही हैं।
-दीप त्रिवेदी