‘आत्मग्लानि’ से बढ़कर मनुष्य का विनाशक कोई नहीं। यह आपके विश्वास से लेकर अस्तित्व तक सबको खत्म कर देता है। फिर भी मन के विज्ञान से पूरी तरह अनजान यह धर्मगुरु सिर्फ अपनी दुकानें चलाने हेतु रोज-रोज मनुष्य को पाप-भाव से भरे जा रहे हैं।
-दीप त्रिवेदी