धर्म क्या है? मन व जीवन का विज्ञान। बुद्ध, कृष्ण, जीसस क्या हैं? हमारे मन व जीवन के Doctor।
-दीप त्रिवेदी
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धर्म क्या है? मन व जीवन का विज्ञान। बुद्ध, कृष्ण, जीसस क्या हैं? हमारे मन व जीवन के Doctor।
-दीप त्रिवेदी
हम ऐसा तो क्या कर डालने वाले हैं कि इतनी बुद्धि लगाकर जी रहे हैं? सोचो, यदि पृथ्वी क्षण भर भी यह सोचने रुक गयी कि मैं घूमूं या न घूमूं तो क्या होगा? हमारा अस्तित्व न मिट जाएगा?
-दीप त्रिवेदी
जीवन सिर्फ वर्तमान है। यहां बीता क्षण कभी लौट के नहीं आ सकता। वहीं आने वाला पल भी कभी कुछ कह के नहीं आता। ऐसे में भूत व भविष्य की सारी उड़ानें सिर्फ हमारे भय की द्योतक हैं, यथार्थ इसमें कुछ भी नहीं होता।
-दीप त्रिवेदी
जो घड़ी के साथ पांच वक्त की नमाज पढ़ेगा वह ‘‘एडीसन’’ कब और कैसे हो पाएगा?
-दीप त्रिवेदी
कई लोग शुभ-मुहूर्त के चक्कर में समय-संजोग व परिस्थिति बन जाने के बावजूद ‘‘कर्म’’ को टालते हैं, वहीं अन्य कई संजोग न बनने के बावजूद इस चक्कर में कर्म कर डालते हैं। यह सब अपनी मौत मरने के ‘‘गालीबे-Idea’’ अच्छे हैं।
-दीप त्रिवेदी
परम स्वतंत्रता का अर्थ है ‘‘स्व-अनुशासन’’ से खुलकर जीना। अहंकार का अर्थ है धर्म, समाज व अच्छे-बुरे के हजारों उधार लिये अनुशासन से जीना।
-दीप त्रिवेदी
‘‘कर्मवाद’’ व ‘‘भाग्यवाद’’ दो समानांतर लकीरें हैं...जो न मिली हैं - ना कभी मिल सकती हैं।
-दीप त्रिवेदी
मनुष्य जन्म लिया है तो कर्म करना एकमात्र ‘‘पूजा’’ है, और कर्तव्य-कर्म निभाना एक मात्र ‘‘ध्यान’’ है। अलग से पूजा या ध्यान वे लोग करते हैं जो कर्मों से विमुख हो चुके हैं।
-दीप त्रिवेदी
यदि वाकई गंगा में डुबकी लगाते ही ‘पाप’ धुल जाते हैं, तो फिर बेचारे Criminals को क्यों जेलों में ठूंसा जा रहा है। गंगा में डुबकी लगवाकर उनके भी ‘पाप’ क्यों नहीं धो दिये जाते हैं?
-दीप त्रिवेदी
अहिंसा को उपलब्ध होने के लिए पक्षपात रहित आंख चाहिए। यदि आप अपने समेत सबके साथ न्यायाधीश जैसा व्यवहार कर सकें तो ही आपके जीवन में से हिंसाएं कम होंगी।
-दीप त्रिवेदी