कोटेशन्स
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हम भी अजीब हैं व हमारे धर्मगुरु भी। हम सिर्फ अपने अहंकार की पूर्ति हेतु अपने धर्म की अच्छाई सुनने उनके पास जाते हैं, व वे सयाने भी इसका ङ्गायदा उठाते हुए हमारा अहंकार सहलाकर अपनी समृद्धि बढ़ाये चले जाते हैं। इससे हम इतने तो अंधे हो जाते हैं कि हमें अपने धर्म की बुराई व दूसरे धर्मों की अच्छाई ही दिखना बंद हो जाती है। यह आपका कितना बड़ा नुकसान है इसकी आप कल्पना तक नहीं कर सकते।

-दीप त्रिवेदी

जैसे कइयों की उम्र के साथ बुद्धि चलना बंद हो जाती है, वैसे ही उम्र के साथ कइयों का Liver भी जवाब दे ही जाता है। फिर उन्हें सादा खाकर ही जीना पड़ता है। यहां सवाल यह कि जो भरी जवानी में सादा खा रहे हैं उनका क्या? कुछ नहीं, कमजोर Liver उन्हें रोज की पचासों बीमारियां पकड़ा ही देता है।

-दीप त्रिवेदी

इस संसार में सच्चे प्रेम से बढ़कर दूसरी कोई ‘‘औषधि’’ नहीं हो सकती।

-दीप त्रिवेदी

कोई भी मनुष्य कितना ही ज्ञानी क्यों न हो, या फिर वह कितनी ही करुणा से क्यों न भरा हो; उसके लिये भी शरीर अपना स्वभाव नहीं छोड़ता है। हमारी ही तरह बीमार उनका शरीर भी पड़ता है; और जहर पिलाये जाने या सूली पर लटकाये जाने पर मृत्यु उनकी भी होती ही है। फिर भी उन्हें चमत्कारों से जोड़ना उनके व्यक्तित्व से खिलवाड़ नहीं तो और क्या है?

-दीप त्रिवेदी

एक बार में एक कार्य पर ध्यान ‘योग’ है, फिर वह कार्य कोई भी क्यों न हो? वैसे ही एक बार में अनेक कार्यों पर ध्यान ‘काम’ है, फिर चाहे वे कार्य आप कितने ही महान या आवश्यक मानकर क्यों न कर रहे हों।

-दीप त्रिवेदी

जीवन सिर्फ वर्तमान है। और उस वर्तमान में न तो भूतकाल की यादें समा सकती है, न भविष्य की चिंताएं। जीवन के सारे दुःखों की जड़ ही इस वर्तमान में भूतकाल या भविष्य को समाने की चेष्टा करने के कारण है।

-दीप त्रिवेदी

जीवन को राह दिखाने हेतु अक्सर ‘शत्रु’...मित्रों से कहीं ज्यादा कारगर सिद्ध होते हैं। उनके कारण ना सिर्फ आपकी सतर्कता बनी रहती है, बल्कि प्रायः वे आपका उत्साह बढ़ाने वाले भी सिद्ध होते हैं। ...ऐसे में इस संसार में नफरत को जगह ही कहां?

-दीप त्रिवेदी

माना इस विश्व में सफलता से ज्यादा उत्साहित करने वाला और कुछ नहीं होता, लेकिन सफलता मिलती सिर्फ उन्हें है जो निराशा के क्षणों में भी अपने प्रयासों में कोई कमी नहीं छोड़ते।

-दीप त्रिवेदी

दुनिया का कोई भगवान इतने छोटे मन का नहीं हो सकता कि उसे चापलूसी या पूजा की आवश्यकता पड़ जाए। और ऐसा करने से वह खुश हो जाए या आपका कुछ फायदा करा दे, यह तो संभव ही नहीं। ...ऐसा तो सिर्फ शैतान ही हो सकता है।

-दीप त्रिवेदी

कार्य का परिणाम आपने क्या व कैसे किया, इससे कहीं ज्यादा आपने कितने विश्वास से किया...इस पर निर्भर है। मुहूर्त व वास्तु निश्चित ही अविश्वास के द्योतक हैं, इसीलिए इनके पदार्पण-मात्र से कार्य असफल हो जाते हैं।

-दीप त्रिवेदी

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