जो सब कर रहे हैं वही आप भी कर रहे हैं। फिर रोते क्यों हैं...? जो सबका हो रहा है वह आपका भी हो ही तो रहा है।
-दीप त्रिवेदी
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जो सब कर रहे हैं वही आप भी कर रहे हैं। फिर रोते क्यों हैं...? जो सबका हो रहा है वह आपका भी हो ही तो रहा है।
-दीप त्रिवेदी
प्रेम और क्रोध एक ही ऊर्जा के दो नाम हैं। एक का ठीक तरीके से उपयोग करना सीख जाओ...दूसरे की ऊर्जा स्वतः ही परिणामकारी कर्मों में लग जाएगी।
-दीप त्रिवेदी
मनुष्य का सारा भूतकाल कचरे के डब्बे जैसा है। उसमें हाथ डालकर जब भी और जो भी निकालोगे, बदबूदार ही होगा। वैसे ही उसकी सारी भविष्य की इच्छाएं पक्षी की तरह आसमान में उड़ने की इच्छा के समान है, जब भी कोशिश करेगा - जमीन पर ही गिरेगा।
-दीप त्रिवेदी
किसी भी प्रकार का Creation करना व कर पाना ईश्वर के निकट होने का सबूत है।
-दीप त्रिवेदी
‘‘क्रोध’’ व ‘‘प्रेम’’...मनुष्य जीवन में ऊर्जा के यही दो केन्द्र हैं। धर्म, शिक्षा व समाज ने मिलकर इन दोनों को ही मनुष्य में से खत्म कर दिया है। इसी से पूरी मनुष्य जाति मर-मरकर जीने को मजबूर है।
-दीप त्रिवेदी
यह प्रकृति चारों ओर से दो-विरोधाभासों से संतुलित है। पृथ्वी पर जितने उभार हैं, उतनी ही गहरी खाइयां हैं। जितना विशाल Space है उतना ही विशाल Time है। यहां जितनी Negative शक्ति है उतनी ही Positive शक्ति भी है। ...बस प्रकृति को उसका यह Balance ही उसे टिकाये हुए है। और हमारा यह हाल इसलिए है कि हम अपना यह Balance बिगाड़ चुके हैं।
-दीप त्रिवेदी
ज्ञान के बड़े-बड़े दावे करने वाला यह मनुष्य दूसरों के बाबत या दूसरे विषयों पर अपनी हजार रायें ऐसे जाहिर करता है मानो उससे बड़ा ज्ञानी कोई हो ही नहीं; लेकिन ‘नींद’, जिसमें वह जीवन का एक-तिहाई हिस्सा गुजारता है, उस बाबत उसे कुछ नहीं मालूम... क्या यह हास्यास्पद नहीं लगता?
-दीप त्रिवेदी
इस पूरी प्रकृति में एक Harmony है, उनमें एक आपसी सामंजस्य है। हमारे शरीर के भी सारे अंगों में आपसी तालमेल है। सिर्फ हम ही हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध या ईसाई बने इतराते फिर रहे हैं। जिस दिन हम सिर्फ इन्सान हो जाएंगे, हममें भी आपसी तालमेल बैठ जाएगा।
-दीप त्रिवेदी
जीवन हो या व्यवसाय ‘‘संतोष’’ सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। एक तो इससे आपकी पीछे हट नहीं होती, दूसरा लोभ व महत्वाकांक्षा के अभाव में आप उटपटांग कार्यों में लग चारों खाने चित नहीं होते व तीसरा शांति से बैठे होने के कारण आपको आगे बढ़ने के सुनहरे मौके दिखाई भी दे जाते हैं।
-दीप त्रिवेदी
मन और शरीर का गहरा ताल्लुक है। शरीर में एसीड बढ़ जाए तो अक्सर चिंताएं पकड़ती हैं। वहीं यह भी सच है कि आपका स्वभाव नकारात्मक हो तो आप ‘‘फल’’ खायेंगे तो भी एसीड पकड़ लेगा।
-दीप त्रिवेदी