हमें जीवन में सुख-शांति व समृद्धि के लिए ज्ञान नहीं, ऊर्जा चाहिए। ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत ‘‘ध्यान’’ है व उसका सबसे बड़ा शत्रु ‘‘सोचना’’ है।
-दीप त्रिवेदी
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हमें जीवन में सुख-शांति व समृद्धि के लिए ज्ञान नहीं, ऊर्जा चाहिए। ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत ‘‘ध्यान’’ है व उसका सबसे बड़ा शत्रु ‘‘सोचना’’ है।
-दीप त्रिवेदी
यह ‘‘संसार’’ क्रमशः प्रगति के सिद्धांत से फैल रहा है। यह विस्तार ना सिर्फ इसके Time व Space में जारी है, बल्कि चेतना के स्तर पर भी जारी ही है। उसने भी अमीबा से मनुष्य तक का सफर क्रमशः ही तय किया है।
-दीप त्रिवेदी
मनुष्य इस ब्रह्मांड का एक मात्र प्राणी है जो सफल और आनंदित हो सकता है । इसीलिये ब्रह्मांड में मनुष्य ही एक मात्र ऐसा प्राणी है जो असफल और दुःखी भी हो सकता है।
-दीप त्रिवेदी
जीवन के सारे प्रयत्न अंत में जीवन में आने वाले सुख-दुःखों को न्यौता देने के अलावा कुछ नहीं। जबकि आपके ‘होनेपन’ में स्थिर होने हेतु किसी प्रयत्न की आवश्यकता नहीं। और मजा यह कि वहां एक नहीं हजार कारण से सिर्फ आनंद-ही-आनंद है।
-दीप त्रिवेदी
आपकी गाड़ी ज्यादा कीमती है या आप? निश्चित ही आप। ...फिर गाड़ी की जगह गले में नींबू-मिरची डालकर क्यों नहीं घूमते, खतरा आप पर ज्यादा है।
-दीप त्रिवेदी
यदि आपको अपने व्यक्तित्व पर पूरा भरोसा हो तो आप पर दूसरे के मान-अपमान का कोई असर नहीं होगा।
-दीप त्रिवेदी
आपने कुछ किया है या आप कुछ कर सकते हैं, यह गलतफहमी कभी मत पालना। ...यह स्पष्टरूप से समझ लें कि आपसे सबकुछ आपका स्वभाव ही करवा रहा है।
-दीप त्रिवेदी
क्या पुनर्जन्म होता है? नहीं और बिल्कुल नहीं। वह इस लिहाज से कि जिसे आप अपना होना मान रहे हैं, जैसे आपका नाम, आपका परिवार, आपका देश, समाज, धर्म या आपकी संपत्ति वह सब तो आपकी मृत्यु के साथ निश्चित ही हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।
-दीप त्रिवेदी
आप मन और जीवन समझना चाहते हैं, तो वह धर्म या विद्यालय नहीं सिखा पाएंगे। उस हेतु तो आपको अपने चारों तरफ घट रही प्राकृतिक घटनाओं को ध्यान से देखना पड़ेगा।
-दीप त्रिवेदी
अब वक्त आ गया है जब विश्वभर के सारे खुले विचारों वाले बुद्धिमान मुस्लिम अपना एक तगड़ा Association बना लें। यदि वे ही हिम्मत नहीं दिखाते, उन्हें ही अपने भाई-बंधुओं की नहीं पड़ी...तो दूसरा कब तक उनके पीछे प्रयास करेगा?
-दीप त्रिवेदी