हमारा मन अद्भुत शक्तियों से भरा पड़ा है, साथ ही इसमें हजारों विकार भी हैं। चूंकि हम मन के विकारों को नहीं जीत पाते, इसीलिए उसकी अद्भुत शक्तियों से भी वंचित रह जाते हैं।
-दीप त्रिवेदी