चूंकि हम ताकतवर के सामने क्रोध दबाते हैं, इसीलिए कमजोरों पर मौके-बे मौके क्रोध निकालते रहते हैं।
-दीप त्रिवेदी
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चूंकि हम ताकतवर के सामने क्रोध दबाते हैं, इसीलिए कमजोरों पर मौके-बे मौके क्रोध निकालते रहते हैं।
-दीप त्रिवेदी
भारत के राजनेताओं व धर्मगुरुओं ने पिछले पचास वर्षों में देश की जनता को क्या सुकून पहुंचाया? और उसके सामने हमारे Legendary गायकों जैसे मोहम्मद रफी, किशोरकुमार व लता-आशा ने हमें क्या कुछ नहीं दिया? आज भी कम-से-कम औसत दो घंटे सबको सुकून से जीना उन्हीं की आवाज के सहारे नसीब हो रहा है।
-दीप त्रिवेदी
बुरी खबर व अच्छी खबर में फर्क क्या है? नींद तो दोनों ही सुरतों में उड़ जाती है। प्रतिक्रिया तो आप दोनों ही सुरतों में देते हैं। व्यक्ति तो वह जिसे कोई खबर हिला ही न सके।
-दीप त्रिवेदी
जीवन के कैसे भी शौक या किसी भी शारीरिक कर्म में कोई बुराई नहीं, यदि सलीके से किये गए हों तो। वैसे ही मंदिर जाने या पूजा करने में भी कोई अच्छाई नहीं। मनुष्य की अच्छाई करुणा, आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता व निर्दोषता जैसे गुणों में छिपी हुई है। जबकि सामने स्वार्थ, ईर्ष्या, पक्षपात व जिद्द जैसे अवगुण ही उसकी बुराई है।
-दीप त्रिवेदी
समझ नहीं आता कि यह जैन मुनि अच्छे खाने, अच्छे कपड़े पहनने से लेकर अच्छे से नहाने व खुशबूदार रहने को भी कैसे पाप कहते हैं? फिर तो उनके अनुसार सारे जानवर वैसे ही ‘‘पक्के जैन’’ हो गये।
-दीप त्रिवेदी
आप अस्तित्व का एक हिस्सा हैं, आपके जीवन की परेशानी यह है कि आप स्वार्थवश अपनी एक अलग दुनिया बनाने में लगे हुए हैं।
-दीप त्रिवेदी
ज्ञान के बड़े-बड़े दावे करने वाला यह मनुष्य दूसरों के बाबत या दूसरे विषयों पर अपनी हजार रायें ऐसे जाहिर करता है मानो उससे बड़ा ज्ञानी कोई हो ही नहीं; लेकिन ‘नींद’, जिसमें वह जीवन का एक-तिहाई हिस्सा गुजारता है, उस बाबत उसे कुछ नहीं मालूम... क्या यह हास्यास्पद नहीं लगता?
-दीप त्रिवेदी
जीवन में गौर करना कि हर हादसे में कुछ-न-कुछ सीखने लायक अवश्य होता है। हमारी समस्या यह है कि हम हादसे में ही खोकर रह जाते हैं व सीखने का अवसर गंवा बैठते हैं।
-दीप त्रिवेदी
सत्य सदैव से है व रहेगा। क्योंकि सत्य विश्व की सारी विरोधाभासी शक्तियों व भावों के बीच के सेतु का नाम है। शक्तियां व भावों में दोनों ओर कितने ही उतार-चढ़ाव आ जाएं, सत्य स्थिर ही रहता है।
-दीप त्रिवेदी
जब हमारे साथ घटने वाली छोटी-से-छोटी घटना भी हजारों वर्षों से घट रही लाखों घटनाओं का जोड़ है, तो ऐसे में आप बुद्धि से क्या गणित बिठाने में लगे हुए हैं? जो व्यक्ति इन घट रही घटनाओं के कारण बदलती परिस्थितियों के गणित को समझता है, वह निश्चित ही बिना कुछ किये जब जो चाहिए पा लेता है।
-दीप त्रिवेदी