यदि आप अपने ‘होनेपन’ व ‘स्वभाव’ को अलग-अलग पहचान लेंगे, तो उसके बाद आपके जीवन में कभी कोई समस्या नहीं आएगी।
-दीप त्रिवेदी
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यदि आप अपने ‘होनेपन’ व ‘स्वभाव’ को अलग-अलग पहचान लेंगे, तो उसके बाद आपके जीवन में कभी कोई समस्या नहीं आएगी।
-दीप त्रिवेदी
आपके मन में छिपे दुःख, क्रोध, चिंताएं व Frustration वगैरह को सिर्फ ‘‘मन का विज्ञान’’ समझकर ही दूर किया जा सकता है।
-दीप त्रिवेदी
पता नहीं यह मुस्लिम समाज वक्त के साथ अपनी कुनीतियां छोड़ने में इतना वक्त क्यों लगाता है? अब जब आज सऊदी अरब में स्त्रियों को मताधिकार का हक दिया जा सकता है, तो यह पचास-सौ साल पहले क्यों नहीं दिया जा सकता था?
-दीप त्रिवेदी
‘ताकतवर आदमी’ क्रोध करने को स्वतंत्र होता है, जबकि ‘कमजोर आदमी’ क्रोध दबाने को मजबूर होता है। इसी से ताकतवर प्रसन्न व कमजोर विकृत होता चला जाता है।
-दीप त्रिवेदी
मन की गहराइयों का जादू तो यह कि अनपढ़ कालीदास व कबीर, कवियों के ‘‘महा-कवि’’ हो जाते हैं। ...और अशिक्षित एडीसन सबसे ज्यादा आविष्कार करने वाला वैज्ञानिक हो जाता है। क्या अब भी आप समझते हैं कि मन की गहराइयों का विज्ञान समझे बगैर आप सफलता पा लेंगे?
-दीप त्रिवेदी
अपनी ही बात को सच्चा मान उसका दृढतापूर्वक साथ तो आप सदियों से देते आ रहे हैं। लेकिन यह क्यों नहीं समझते कि यथायोग्य आलोचना सहे बगैर वक्त के अनुसार राह नहीं पायी जा सकती। मनुष्य की चेतना का यह नियम है कि जो जितना अपने खिलाफ सुनने को तैयार रहता है, उतना ही वह निखरता चला जाता है। अपनी ही कट्टरता के कारण विश्वभर के मुसलमान भाई ‘‘बुद्धिमानों’’ की इस अपार करुणा से करीब-करीब वंचित हैं।
-दीप त्रिवेदी
विज्ञान का मनुष्य के शरीर बाबत सारा ज्ञान Probabilities पर टिका हुआ है। जहां अधिकांश कैन्सर के मरीज तम्बाखू से दूर रहने वाले होते हैं...वहीं अधिकांश अटैक Cholestrol High न होने वालों को आते हैं।
-दीप त्रिवेदी
मनुष्य का उसके स्वभाव के अलावा कोई शत्रु नहीं।
-दीप त्रिवेदी
आपके पास क्या और कितना है यह आपके धनी होने का सबूत नहीं...पर हां, आप क्या व कितना और पाना चाहते हैं, यह आपकी दरिद्रता को अवश्य दर्शाता है।
-दीप त्रिवेदी
मनुष्य की बुद्धिमत्ता ऐसे चुनावों में छिपी है जहां से वह जो भी चाहे या पाये...उससे सिर्फ सुख ही उत्पन्न हो।
-दीप त्रिवेदी