कोटेशन्स
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जैसे शारीरिक बीमारियां होने पर कड़वी दवाइयां पिलायी जाती है, वैसे ही मानसिक बीमारी होने पर कड़ा व्यवहार भी करना ही पड़ता है। यही कारण है कि सिर्फ मीठा व अच्छा बोलनेवाले हमारे जीवन के लिये बड़े घातक सिद्ध होते हैं।

-दीप त्रिवेदी

दुनिया का ऐसा कोई सुख नहीं जिसे भोगने पर बराबरी का दुःख न झेलना पड़ता हो। सो, दुःख से बचना हो तो भोक्तापन का एहसास दफना दो। और यह तभी संभव है जब आप ‘‘कर्तापन’’ का गुमान पालना बंद कर दें।

-दीप त्रिवेदी

जो ‘नाम’ और ‘दाम’ के लिये काम करते हैं वे जीवन में कहीं नहीं पहुंच पाते। ...पर जो अपनी ही धुन में सिर्फ काम के लिए काम करता है, वह ‘‘नाम और दाम’’ दोनों पा जाता है।

-दीप त्रिवेदी

प्रेम कोरे शब्दों या भावों से नहीं, आपस में करनेवाले व्यवहारों के अंतिम परिणाम से सिद्ध होता है। आपके आसपास सभी प्रसन्न व स्वस्थ - तो आपका प्रेम सच्चा।

-दीप त्रिवेदी

क्या आप अपनी मन-रूपी धरती को स्थिर नहीं रख सकते? रख सकते हैं, यदि आप अपना ध्यान जीवन में आने वाले सुख-दुःखों से हटाकर मात्र अपने ‘‘होनेपन’’ पर स्थिर रख सकें।

-दीप त्रिवेदी

सफल मनुष्य-जीवन जीने के लिए मनुष्य के स्वभाव में...एक कलाकार हृदय, वैज्ञानिक दृष्टि, व्यावसायिक बुद्धि, आत्मनिर्भरता का गुमान, आनंद लेने की कला, जीवन संबंधित सारे शौक व अंतःमस्ती; इन सातों स्वभाव का यथायोग्य मिश्रण होना आवश्यक है।

-दीप त्रिवेदी

ब्रह्मांड की यह विशाल Space कहीं खत्म नहीं होती। सोचो, यदि खत्म हो तो भी उसके आगे क्या होगा? वह भी सिवाय Space के और कुछ नहीं हो सकता। इतने निश्चित Infinite ब्रह्मांड में हम किन-किन बातों की चिंता पाले हुए हैं?

-दीप त्रिवेदी

न शिक्षा, न समाज, न तथाकथित धर्म हमें यह समझा रहे कि जीवन में सरलता, निर्दोषता, स्वार्थहीनता, भोलापन व करुणा इत्यादि का क्या महत्व है। जबकि हकीकत यह है कि संसार की सभी सर्वश्रेष्ठ रचनाएं, सारे आविष्कार व सारी कलाएं ऐसे ‘‘मन’’ वाले व्यक्तियों के जहन से ही निकली है।

-दीप त्रिवेदी

अपना मन जाने बगैर जीवन की कोई सफलता हासिल नहीं की जा सकती। लेकिन मन समझने हेतु ना तो किताबें उपलब्ध हैं ना शिक्षाएं ही। मनुष्य की इतनी असफलता का यही एक कारण है।

-दीप त्रिवेदी

कई लोग शुभ-मुहूर्त के चक्कर में समय-संजोग व परिस्थिति बन जाने के बावजूद ‘‘कर्म’’ को टालते हैं, वहीं अन्य कई संजोग न बनने के बावजूद इस चक्कर में कर्म कर डालते हैं। यह सब अपनी मौत मरने के ‘‘गालीबे-Idea’’ अच्छे हैं।

-दीप त्रिवेदी

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