‘‘जागृत-व्यक्ति’’ वो है, जिसकी उपस्थिति में उसके आसपास के मनुष्य ही नहीं, घटनायें व कुदरत भी वही करने को मजबूर हो जाए जो वह चाहता है। ...ऐसा जागृत हो जाना कोई बहुत बड़ी बात नहीं।
-दीप त्रिवेदी