जो ‘नाम’ और ‘दाम’ के लिये काम करते हैं वे जीवन में कहीं नहीं पहुंच पाते। ...पर जो अपनी ही धुन में सिर्फ काम के लिए काम करता है, वह ‘‘नाम और दाम’’ दोनों पा जाता है।
-दीप त्रिवेदी