जिसे अपने से प्रेम नहीं वह विश्व में किसी से प्रेम नहीं कर सकता। और जिसे अपने से प्रेम हो वह कम-से-कम धर्म या शिक्षा के नाम पर किसी को सताएगा तो नहीं ही...।
-दीप त्रिवेदी
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जिसे अपने से प्रेम नहीं वह विश्व में किसी से प्रेम नहीं कर सकता। और जिसे अपने से प्रेम हो वह कम-से-कम धर्म या शिक्षा के नाम पर किसी को सताएगा तो नहीं ही...।
-दीप त्रिवेदी
इस संसार में सच्चे प्रेम से बढ़कर दूसरी कोई ‘‘औषधि’’ नहीं हो सकती।
-दीप त्रिवेदी
जो और जैसा सामने है...उसे स्वीकारने के अलावा मनुष्य के पास कोई उपाय नहीं। जितनी जल्दी आप स्वीकारके आगे के कार्यों में लग जाते हैं, उतनी ही आप प्रगति करते हैं।
-दीप त्रिवेदी
हम रात को ही सो रहे हैं, ऐसा नहीं है। हमारी दिन की नींद तो उससे भी कहीं गहरी है। हम बमुश्किल कभी-कभार क्षणभर को जागते हैं। जागने का अर्थ है आपके मन, शरीर, बुद्धि द्वारा कार्य आपके निर्देश पर हो रहे हैं।
-दीप त्रिवेदी
क्या ये ‘क्रिश्चियन’ उसी जीसस के अनुयायी हैं जो सबके उद्धार के लिये हंसते-हंसते सूली चढ़ गए? सच बोलने के बावजूद ‘बाइबल’ के नाम पर पादरियों ने गैलेलियो का जो हाल किया था, उसे देखते हुए मुझे तो ऐसा नहीं लगता।
-दीप त्रिवेदी
हम आपस में एक दूसरे के प्रति आया क्रोध दबाते हैं, इसी कारण एक दिन हमारे आपस में बड़े झगड़े हो जाते हैं। जिन दो व्यक्तियों में रोज थोड़े-थोड़े झगड़े होते रहते हैं उनमें कभी जीवनभर की दुश्मनी नहीं होती।
-दीप त्रिवेदी
जीवन में कुछ भी हासिल सिर्फ कार्य करने से किया जा सकता है। ‘‘कार्य’’ बुद्धिमत्तापूर्वक किये कर्म का नाम है। कर्म करने में सक्षम व्यक्ति कभी भाग्य भरोसे नहीं बैठता, क्योंकि वह भाग्य पर विश्वास कर ही नहीं सकता।
-दीप त्रिवेदी
यह ‘‘संसार’’ क्रमशः प्रगति के सिद्धांत से फैल रहा है। यह विस्तार ना सिर्फ इसके Time व Space में जारी है, बल्कि चेतना के स्तर पर भी जारी ही है। उसने भी अमीबा से मनुष्य तक का सफर क्रमशः ही तय किया है।
-दीप त्रिवेदी
ईश्वर पर भरोसा करने वाला मैं उसे मानता हूँ जो चाहे जो घट जाए... उसे ईश्वर की मरजी मानकर उसी क्षण हंसते-हंसते स्वीकारने की क्षमता रखता हो।
-दीप त्रिवेदी
बुद्धिमान वह नहीं है जिसे पानी का Formula यानी H2O मालूम है। बुद्धिमान वह है जिसे कब प्यास लगी यह मालूम है व कितना पानी पीना इसका एहसास है।
-दीप त्रिवेदी