प्रेम कोरे शब्दों या भावों से नहीं, आपस में करनेवाले व्यवहारों के अंतिम परिणाम से सिद्ध होता है। आपके आसपास सभी प्रसन्न व स्वस्थ - तो आपका प्रेम सच्चा।
-दीप त्रिवेदी
Copyright © 2012. ---
प्रेम कोरे शब्दों या भावों से नहीं, आपस में करनेवाले व्यवहारों के अंतिम परिणाम से सिद्ध होता है। आपके आसपास सभी प्रसन्न व स्वस्थ - तो आपका प्रेम सच्चा।
-दीप त्रिवेदी
दूसरों पर हिंसा वही मनुष्य कर पाता है, जो जाने-अनजाने स्वयं को सता रहा हो। बाकी स्वयं से प्रेम करने वाला कभी दूसरों का अहित कर ही नहीं सकता।
-दीप त्रिवेदी
किसी भी प्रकार का Creation करना व कर पाना ईश्वर के निकट होने का सबूत है।
-दीप त्रिवेदी
हमारा मन अद्भुत शक्तियों से भरा पड़ा है, साथ ही इसमें हजारों विकार भी हैं। चूंकि हम मन के विकारों को नहीं जीत पाते, इसीलिए उसकी अद्भुत शक्तियों से भी वंचित रह जाते हैं।
-दीप त्रिवेदी
व्यवस्थित भोजन व नियमित व्यायाम शरीर की सबसे बड़ी जरूरत है। इसमें संतुलन बिठा पाने वाला ही जीवन का आनंद ले सकता है। Dieting, सिर्फ व्यायाम या ‘No व्यायाम’ शरीर के साथ खिलवाड़ है।
-दीप त्रिवेदी
मनुष्य जन्म लिया है तो कर्म करना एकमात्र ‘‘पूजा’’ है, और कर्तव्य-कर्म निभाना एक मात्र ‘‘ध्यान’’ है। अलग से पूजा या ध्यान वे लोग करते हैं जो कर्मों से विमुख हो चुके हैं।
-दीप त्रिवेदी
एक बार में एक कार्य पर ध्यान ‘योग’ है, फिर वह कार्य कोई भी क्यों न हो? वैसे ही एक बार में अनेक कार्यों पर ध्यान ‘काम’ है, फिर चाहे वे कार्य आप कितने ही महान या आवश्यक मानकर क्यों न कर रहे हों।
-दीप त्रिवेदी
मनुष्य के लिए उसके अपने जीवन हेतु सबसे ज्यादा कीमती समय, शक्ति व धन है। धार्मिक क्रियाएं इन तीनों का जमकर शोषण करती हैं।
-दीप त्रिवेदी
क्या विज्ञान कभी जीवन पैदा कर पाएगा? नहीं, सवाल ही नहीं उठता। क्योंकि पैदा या नष्ट करने की सत्ता यहां किसी के पास नहीं।
-दीप त्रिवेदी
किसी भी बात का दृढ़तापूर्वक इन्कार करना, आज नहीं कल उस ‘वस्तु’ को जीवन में खतरनाक स्वरूप धारण करने हेतु न्यौता देना है।
-दीप त्रिवेदी