इस ब्रह्मांड में सूर्य, पानी, हवा सब अपने कार्य में तो लगे हैं पर इनको आकांक्षा कोई नहीं। पाना कुछ नहीं। जब हम भी बिना किसी आकांक्षा के कार्यों में व्यस्त होना सीख जाएंगे, तो संतोष के परम-शिखर पर जा बैठेंगे।
-दीप त्रिवेदी