यह नहीं है कि आम भारतीय के I-Q से ज्यादा I-Q वाले लोग कुछ देशों में है। फर्क सिर्फ इतना है कि वे उसका सकारात्मक उपयोग करना जानते है, व उन्हें वैसा वातावरण भी उपलब्ध है। जबकि भारतियों का पूरा-का-पूरा I-Q अपनी Image बनाने व लोगों की Smartness से निपटने में ही खर्च हो जाता है।
-दीप त्रिवेदी