कोटेशन्स
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आप शाकाहारी हैं तो इसमें इतना तनने की क्या बात है? तनना ही हो तो मांसाहारियों के ईजाद किये हवाईजहाज, गाड़ियों, ए.सी. से लेकर बीमार पड़ने पर ब्लड-टेस्ट तक के उपयोग बंद करके दिखाओ।

-दीप त्रिवेदी

एडीसन ने बिना देश-धर्म की सीमा में बंधे सबका हित चाहा व बल्ब का आविष्कार किया; वह सफल हो गया। बुद्ध व जीसस ने अपने ही धर्म-जाति का विरोध कर सबका हित चाहा और वे भी सदैव के लिये अमर हो गये।

-दीप त्रिवेदी

हमारे भीतर की आत्मा ही इस जगत की सबसे ज्यादा शक्तिशाली शक्ति है। यह आत्मा ही परमात्मा है। यह सब सुनने-समझने के बावजूद हम मंदिर-मस्जिदों में जाते हैं...तो यह सिवाय स्वयं की आत्मा पर अश्रद्धा के और क्या दर्शाता है?

-दीप त्रिवेदी

शक्तिशाली व सकारात्मक विचार वालों से मिलो तो आप तत्काल ऊर्जा से भर जाते हैं। नकारात्मक विचार के व्यक्ति से मिलते ही हमारी शक्ति क्षीण हो जाती है। ...सोचो, जो खुद नकारात्मक हो, उसका क्या हाल होता होगा?

-दीप त्रिवेदी

जो भी ऐतिहासिक मनुष्य हुए हैं, वे वो हैं जिन्होंने कुछ नया किया है। फिर नया उन्होंने चाहे विज्ञान, धर्म, व्यवसाय, संगीत, साहित्य या फिर Movie-making में ही क्यों नहीं किया हो? सोचना यह है कि ‘धर्म व शिक्षा’ के नाम पर हम जो ग्रहण कर रहे हैं, उसमें कुछ नया है भी या ऐसे ही ग्रहण किये चले जा रहे हैं?

-दीप त्रिवेदी

दुनिया का कोई भगवान इतने छोटे मन का नहीं हो सकता कि उसे चापलूसी या पूजा की आवश्यकता पड़ जाए। और ऐसा करने से वह खुश हो जाए या आपका कुछ फायदा करा दे, यह तो संभव ही नहीं। ...ऐसा तो सिर्फ शैतान ही हो सकता है।

-दीप त्रिवेदी

जितना आप प्राकृतिक हो के जीते हैं उतनी ही आपको प्रकृति से ऊर्जा मिलती है। ध्यान रहे कि जीवन को सफल बनाने हेतु आपकी अपनी ऊर्जा बहुत कम पड़ती है।

-दीप त्रिवेदी

जीवन को आगे बढ़ाने का रहस्य सिर्फ आपका ‘मन’ जानता है। मन और बुद्धि का कोई Communication नहीं। अतः जो बातें आपकी बुद्धि को आगे बढ़ने वाली जान पड़े, समझ लेना वह पीछे धकेल देगी; व जो पीछे ले जाने वाली मालूम पड़े, समझ लेना उसी के सहारे आप सफलता के शिखर छू पाएंगे।

-दीप त्रिवेदी

जो भी परिणामकारी ज्ञान है वह मनुष्य के भीतर मन की गहराइयों में ही छिपा पड़ा है। यही कारण है कि मोजार्ट की धुनें हो या उमर खय्याम की रुबाइयां, कृष्ण की भगवद्गीता हो या आईन्स्टाइन का दुनिया बदलकर रख देने वाला सिद्धांत E=mc2; सब भीतर से बाहर निकली चीजें ही हैं।

-दीप त्रिवेदी

‘‘वक्त’’ वह धार है जो ‘‘कृष्ण’’ जैसे सर्वश्रेष्ठ व्यक्तित्व को भी मौत की नींद सुला देता है। लेकिन उनका जीया जीवन व उनकी कही भगवद्गीता उन्हें अमर बना देती है। मरना आपको भी है, फिर कुछ ऐसा कर के क्यों नहीं मरते कि मर के भी न मरो।

-दीप त्रिवेदी

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