कोटेशन्स
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आदिकाल से धर्मगुरुओं व राजनेताओं की बनती चली आ रही है। दोनों में से कोई ना तो कलाकार है, ना ही वैज्ञानिक। फिर भी सबको दबाकर व लड़वाकर बड़ा बनने की चाह शुरू से ही दोनों में है। इसी से अब उन दोनों का मिलन अटूट हो चुका है।

-दीप त्रिवेदी

स्वस्थ जीवन जीना चाहते हैं तो चालीस वर्ष तक डटकर खाएं व जमकर व्यायाम करें। हमारे दादा-पापा यही करते थे। हमने चरबी वाले खाने व Acidic Food को अलग से पहचाना और जिसके परिणामस्वरूप आज का युवा डर-डरकर खाने लगा। परिणाम में आजकल बच्चों की सेवा बाप-दादाओं को करनी पड़ रही है।

-दीप त्रिवेदी

यदि हमेशा आनंद में रहना चाहते हो तो जीवन के संघर्षों से भी एक खेल मानकर उलझो। देखें; संघर्ष हमसे जीतता है या हम संघर्ष से?

-दीप त्रिवेदी

जो ‘है’ उसका आनंद लेना तो समझ में आता है; पर उसके बिछड़ने का मातम मनाना हमेशा से समझ के परे रहा है।

-दीप त्रिवेदी

एक समझदार व्यक्ति के लिए सोचने वाली बात यह कि पिछले पांच हजार वर्षों के इतिहास में हुए करोड़ों संत, मौलविओं व पादरियों ने मिलकर जगत का कितना उद्धार किया? और उसके सामने पांच-सौ वैज्ञानिकों ने जगत को क्या दिया? ...हमें सिर्फ यह तय करना है कि मनुष्य के प्रति वास्तविक करुणा से कौन भरा है?

-दीप त्रिवेदी

वक्त ने ऐसी करवट ली कि संतों और व्यवसायियों की परिभाषा ही परिवर्तित हो गयी। पाखंड के नाम पर लाखों को लूटने वाले व्यवसायी आजकल ‘संत’ बने बैठे हैं। जबकि वास्तविक संत तो वे हैं जो अपनी कर्मठता से व्यवसाय फैलाकर लाखों को रोजगार दिये हुए हैं।

-दीप त्रिवेदी

एक सच्चा आस्तिक, नास्तिक-सा भासता है; क्योंकि वह आपके धार्मिक पाखंडों व आपके धर्म के दलालों पर हमले बोलता है। वह भी क्या करे, उसका ईश्वर से Direct Contact जो हो जाता है।

-दीप त्रिवेदी

यदि आप ‘‘अपने’’ किसी कार्य या विचारों से असंतुष्ट हैं तो भी उन्हें बदलने की कोशिश मत करना, आप असफल हो जाएंगे। आप अपना स्वभाव बदल दो; कार्य व विचार स्वतः ही बदल जाएंगे।

-दीप त्रिवेदी

जनसंख्या Liability भी हो सकती है व Asset भी। यदि हर वयस्क काम करे तो ही जनसंख्या Asset हो सकती है। एक कमाए व चार खायें, यह परिवार ही नहीं, देश के लिए भी घातक है। ...ऐसे में पंडितों व संन्यासियों को पालने का सवाल ही कहां आता है?

-दीप त्रिवेदी

विज्ञान वस्तुओं की सायकोलोजी के रूपांतरण का नाम है। धर्म मनुष्य की सायकोलोजी को रूपांतरित करनेवाले ज्ञान का नाम है। विज्ञान मनुष्य को भौतिक सुख तो दे सकता है, परंतु मानसिक सुख हेतु तो मनुष्य को अपनी सायकोलोजी रूपांतरित करनी ही रही। अतः दोनों का यथायोग्य समन्वय मनुष्य व संसार दोनों के उत्थान का मार्ग है।

-दीप त्रिवेदी

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