कोटेशन्स
व्यंग्य

जो घड़ी के साथ पांच वक्त की नमाज पढ़ेगा वह ‘‘एडीसन’’ कब और कैसे हो पाएगा?

-दीप त्रिवेदी

जब कयामत के दिन सारे फैसले हो ही जाने वाले हैं, तो फिर आज बंदूक उठाकर व निर्दोषों की हत्या कर ये आतंकवादी कौन-सा फैसला करने में लगे हुए हैं?

-दीप त्रिवेदी

विश्व के किसी भी देश को जितना सुकून कलाकारों ने पहुंचाया है; उतना ही चैन उनका वहां के राजनेताओं व धर्मगुरुओं ने मिलकर लूटा है।

-दीप त्रिवेदी

मैं आपके उन धर्म गुरुओं में से हूँ जिसने जैसे ही पाया कि मुझ में आगे बढ़ने के कोई गुण जैसे कला, विज्ञान, मेहनत करने की लगन या डिग्री कुछ भी नहीं; तो मैंने आश्वासनों व आशीर्वादों की दुकान खोल ली। ...और देखो आज मेरे पास एकड़ों में जमीन, अपना आश्रम व आप जैसे हजारों बुद्धिमान श्रद्धालु हैं।

-दीप त्रिवेदी

ज्ञान के बड़े-बड़े दावे करने वाला यह मनुष्य दूसरों के बाबत या दूसरे विषयों पर अपनी हजार रायें ऐसे जाहिर करता है मानो उससे बड़ा ज्ञानी कोई हो ही नहीं; लेकिन ‘नींद’, जिसमें वह जीवन का एक-तिहाई हिस्सा गुजारता है, उस बाबत उसे कुछ नहीं मालूम... क्या यह हास्यास्पद नहीं लगता?

-दीप त्रिवेदी

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