बाहर की दुनिया से आपका मन चाहे जो ग्रहण करेगा, वह जीवन को सिर्फ पीछे ले जाने वाला सिद्ध होगा। भीतर से आपका मन जो और जितना प्रकट करेगा, वही जीवन को आगे बढ़ाने वाला सिद्ध होगा।
-दीप त्रिवेदी