भूत या भविष्य का किसी भी स्वरूप में सामने आना या उस बाबत एक क्षण को भी कुछ सोचना ...यही तो ‘अहंकार’ है।
-दीप त्रिवेदी
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भूत या भविष्य का किसी भी स्वरूप में सामने आना या उस बाबत एक क्षण को भी कुछ सोचना ...यही तो ‘अहंकार’ है।
-दीप त्रिवेदी
यदि अन्यों से हम अपने को विशिष्ट मानकर व्यवहार करने की अपेक्षा छोड़ दें तो हमारे सारे दुःख तिरोहित हो जायें। जब बुद्ध से लेकर जीसस तक के श्रेष्ठ ऐतिहासिक पुरुषों को अपने समय में किसी ने नहीं समझा तो आप क्यों ‘‘आपको कोई समझे’’...उसकी अपेक्षा किये बैठे हैं?
-दीप त्रिवेदी
यदि आप कोई बड़ा कर्म डूबकर व बिना किसी आकांक्षा के कर सकें, तो मेरा विश्वास कीजिए कि उस एक कर्म से ही आप ‘‘ऐतिहासिक पुरुष’’ हो जाएंगे।
-दीप त्रिवेदी
क्या कभी आपने शेर को शिकार करते सिखाने की, या बंदरों को उछलना सिखाने की; या फिर गाय को मांसाहार न खाने की सलाह देने वाली Classes देखी है? तो फिर हमें क्या व क्यों सिखाया जा रहा है? कहीं हमारे धर्मगुरु व शास्त्र हमें जानवरों से भी गये-बीते तो नहीं समझ रहे?
-दीप त्रिवेदी
जीवन में जो सफल हैं वो इसलिए नहीं कि वे उच्च शिक्षित हैं, बहुत ज्ञानी हैं या कर्मठ होकर कार्य करने वाले हैं। बल्कि उनकी सफलता का रहस्य यह है कि उन्होंने जीवन में सिर्फ अत्यावश्यक ज्ञान व जरूरत पूरती ही शिक्षा ग्रहण की है ...तथा कार्यों में भी वे यथायोग्य चेष्टा ही कर रहे हैं। ऐसा कर वे अपने बहुमूल्य समय व ऊर्जा की बचत करते हैं, और अंत में वही उन्हें सफलता के मार्ग पर लगाने में सहायक सिद्ध होती है।
-दीप त्रिवेदी
बुरी खबर व अच्छी खबर में फर्क क्या है? नींद तो दोनों ही सुरतों में उड़ जाती है। प्रतिक्रिया तो आप दोनों ही सुरतों में देते हैं। व्यक्ति तो वह जिसे कोई खबर हिला ही न सके।
-दीप त्रिवेदी
जीवन सिर्फ वर्तमान है। और उस वर्तमान में न तो भूतकाल की यादें समा सकती है, न भविष्य की चिंताएं। जीवन के सारे दुःखों की जड़ ही इस वर्तमान में भूतकाल या भविष्य को समाने की चेष्टा करने के कारण है।
-दीप त्रिवेदी
धार्मिक व्यक्ति चीजों को सलीके से अपनाना जानता है; अधार्मिक मारे ‘‘डर’’ के वस्तुओं का ही त्याग करता फिरता है।
-दीप त्रिवेदी
जब पूरा विश्व ही धन की दौड़ में भाग रहा है तो मनुष्य शरीर की रक्षा करने वाले Doctors कैसे पीछे रह जाएं? हमारे सारे Blood Testकी Border Lines ही ऐसी बनायी गयी है कि एक नहीं तो दूसरी बढ़-घट किसी-न-किसी चीज में आ ही जाए, ताकि उनकी दवाइयां बिकती रहें।
-दीप त्रिवेदी
समृद्धि के लिए लक्ष्मीपूजन कर लक्ष्मी को परेशान सिर्फ भारत में किया जाता है। ...लगता है इस परेशानी के कारण ही लक्ष्मी भारत से रूठ गयी है। क्या ही अच्छा हो यदि समृद्धि के लिये हम अपने ‘‘कर्मों’’ पर ही आस्था बढ़ाएं।
-दीप त्रिवेदी