कोटेशन्स
मन

बुद्धि लाख समझे कुछ नहीं होता, समझना ‘‘मन’’ को होता है। क्रोध में गलत निर्णय होने के कारण बुद्धि लाख निर्णय कर ले कि अगली बार क्रोध नहीं करना, पर मन ने क्रोध भेजा नहीं कि मनुष्य क्रोधित हुआ नहीं।

-दीप त्रिवेदी

पाप-पुण्य, मान-अपमान, अच्छा-बुरा, सफलता-असफलता यह सब बुद्धि के किये विभाजन हैं। मन के तल पर तो यह सिवाय व्यर्थ के उपद्रवों के और कुछ नहीं।

-दीप त्रिवेदी

कोई भी शारीरिक प्रतिबंध दो-कौड़ी का है। महत्वपूर्ण वह प्रज्ञा है जिससे आपका मन परिवर्तित हो जाए।

-दीप त्रिवेदी

बुद्धि तोड़कर देखती है, क्योंकि उसे सिर्फ वस्तुओं की पहचान है। जबकि मन वस्तुओं को अलग से जानता ही नहीं; वह तरंगों व उनकी गहराइयों को ही समझता है। बस इन दोनों में आपसी Communication न बिठा पाने के कारण ही सभी पूरी तरह असफल हैं।

-दीप त्रिवेदी

आपके मन में छिपे दुःख, क्रोध, चिंताएं व Frustration वगैरह को सिर्फ ‘‘मन का विज्ञान’’ समझकर ही दूर किया जा सकता है।

-दीप त्रिवेदी

हमारे मन व जीवन के सिद्धांत, विज्ञान के सिद्धांतों से कहीं गहरे व ऊंचे हैं। दरअसल विज्ञान की भी सारी खोजें तो मन व जीवन के सिद्धांतों को ही आभारी हैं।

-दीप त्रिवेदी

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