हर कोई अपनी जाति व धर्म पर गुमान किये फिरता है। मेहरबानी कर एकबार स्वयं को व अपने आसपास वालों को ध्यान से देख लेना - गुमान स्वतः छू हो जाएगा। और तब कहीं जाकर आप विश्व को अपनाकर उन्नति के रास्ते पर लग सकेंगे।
-दीप त्रिवेदी