जो मनुष्य अपने जीवन के सफलता या असफलताओं की जवाबदारी स्वयं ले...वह धार्मिक। जो यह जवाबदारी पूजा-पाठ, ज्योतिष, वास्तु, परिवार या मित्रों को सौंपे...वह अधार्मिक।
-दीप त्रिवेदी