कोटेशन्स
कर्म

समृद्धि के लिए लक्ष्मीपूजन कर लक्ष्मी को परेशान सिर्फ भारत में किया जाता है। ...लगता है इस परेशानी के कारण ही लक्ष्मी भारत से रूठ गयी है। क्या ही अच्छा हो यदि समृद्धि के लिये हम अपने ‘‘कर्मों’’ पर ही आस्था बढ़ाएं।

-दीप त्रिवेदी

कई लोग शुभ-मुहूर्त के चक्कर में समय-संजोग व परिस्थिति बन जाने के बावजूद ‘‘कर्म’’ को टालते हैं, वहीं अन्य कई संजोग न बनने के बावजूद इस चक्कर में कर्म कर डालते हैं। यह सब अपनी मौत मरने के ‘‘गालीबे-Idea’’ अच्छे हैं।

-दीप त्रिवेदी

हमारे हर कर्मों का फल हमें हाथोंहाथ कर्म करते वक्त की मनोदशाओं के रूप में मिल ही रहा है। ...वे धोखेबाज हैं जो कर्म के फलों के नाम पर धर्मों का जाल बिछाये चले जा रहे हैं।

-दीप त्रिवेदी

कर्म को शरीर से जोड़कर देखना निम्नतम स्तर की बुद्धि का काम है। इसमें उपवास करने से लेकर कड़ी मेहनत करने जैसी तमाम वस्तुओं का समावेश हो जाता है। श्रेष्ठ बुद्धि कर्म को भाव से जोड़कर देखती है। भाव शुद्ध - कर्म शुभ। परंतु परमज्ञानी ‘‘कर्म’’ को परिणाम से जोड़कर देखता है। आपके कर्म का जो अंतिम परिणाम आया, वही आपकी ‘‘मंशा’’।

-दीप त्रिवेदी

जो वस्तु एक समय पर एक स्थान में योग्य है, वही समय व स्थान बदलते ही अयोग्य हो जाती है। ऐसे में हम अच्छे व बुरे कर्मों की कौन-सी List बनाने में लगे हुए हैं।

-दीप त्रिवेदी

यदि आप कोई बड़ा कर्म डूबकर व बिना किसी आकांक्षा के कर सकें, तो मेरा विश्वास कीजिए कि उस एक कर्म से ही आप ‘‘ऐतिहासिक पुरुष’’ हो जाएंगे।

-दीप त्रिवेदी

एक बार में एक कार्य पर ध्यान ‘योग’ है, फिर वह कार्य कोई भी क्यों न हो? वैसे ही एक बार में अनेक कार्यों पर ध्यान ‘काम’ है, फिर चाहे वे कार्य आप कितने ही महान या आवश्यक मानकर क्यों न कर रहे हों।

-दीप त्रिवेदी

दुनिया में दो ही तरीके के कार्यों को शुभ माना जा सकता है। पहला वह जिसमें आपको आनंद की अनुभूति हो रही हो पर दूसरे का कोई नुकसान न हो रहा हो। (ध्यान रहे, इसमें दूसरों के काल्पनिक या अहंकारजनित नुकसान गिनने को नहीं कह रहा) व दूसरा शुभ वह कार्य है जिसे निपटायें तो उससे लाखों लाभान्वित हों।

-दीप त्रिवेदी

आप आज जो कुछ भी हैं, वह और कुछ नहीं इस जन्म में आपके किये कार्यों के जोड़ का परिणाम है। इसका अर्थ यह हुआ कि यदि आपने कर्मों के प्रति बचपन से सजगता रखी होती तो आज आप कुछ और होते। इसका अर्थ यह भी हुआ कि यदि अब भी आप आगे के लिए अपने कर्मों के प्रति सजग हो जाएं...तो निश्चित ही आप वो हो सकते हैं जो होना चाहते हैं।

-दीप त्रिवेदी

यदि आप ‘‘अपने’’ किसी कार्य या विचारों से असंतुष्ट हैं तो भी उन्हें बदलने की कोशिश मत करना, आप असफल हो जाएंगे। आप अपना स्वभाव बदल दो; कार्य व विचार स्वतः ही बदल जाएंगे।

-दीप त्रिवेदी

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