Complex की जड़ तुलनात्मक शिक्षाओं के कारण मजबूत होती है । दो वस्तुओं या मनुष्यों की तुलना करने से ज्यादा मूर्खतापूर्ण कार्य इस संसार में दूसरा कोई नहीं।
-दीप त्रिवेदी
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Complex की जड़ तुलनात्मक शिक्षाओं के कारण मजबूत होती है । दो वस्तुओं या मनुष्यों की तुलना करने से ज्यादा मूर्खतापूर्ण कार्य इस संसार में दूसरा कोई नहीं।
-दीप त्रिवेदी
मंदिर-मस्जिद-चर्च न जाने वाले करोड़ों-करोड़ लोग इस विश्व में जी रहे हैं, और हकीकत यह है कि वे ज्यादा चैन व मजे से जी रहे हैं। लेकिन संसार का कोई भी व्यक्ति आज ‘‘विज्ञान’’ के उपयोग के बगैर नहीं जी रहा। जी के देख लें, ‘नर्क’ किसे कहते हैं...पता चल जाएगा।
-दीप त्रिवेदी
भविष्य रहस्यमय है। भविष्य हमेशा अनिश्चितताओं से भरा हुआ है। वह कभी भी किसी के भी नियंत्रण में नहीं रहा है। इसीलिये भविष्य का विचार करते ही मनुष्य का मन भय, चिंता और असुरक्षा के कंपन पकड़ लेता है।
-दीप त्रिवेदी
हमारे व बुद्ध, कृष्ण या जीसस में फर्क क्या है? पहले तो वे मन के विकारों से उबरकर उसकी शक्तियों से ओतप्रोत हो गये, और फिर उसी शक्ति को उन्होंने जगत के उद्धार में लगाया। और हम - ऐसे तो निर्गुणी कि खुद ‘अपने उद्धार की शक्ति’ भी नहीं जुटा पा रहे।
-दीप त्रिवेदी
हमारे मन रूपी कण में ईश्वर अपने तीनों Dimensions के साथ पूरी दृढ़ता से उपस्थित है।
-दीप त्रिवेदी
शक्तिशाली व सकारात्मक विचार वालों से मिलो तो आप तत्काल ऊर्जा से भर जाते हैं। नकारात्मक विचार के व्यक्ति से मिलते ही हमारी शक्ति क्षीण हो जाती है। ...सोचो, जो खुद नकारात्मक हो, उसका क्या हाल होता होगा?
-दीप त्रिवेदी
जीवन साठ वर्ष का है, यह मानकर हम पूरे जीवन को ‘‘एक’’ मानकर जीते हैं। इसी कारण भूतकाल की यादें व भविष्य का डर हमें सताता रहता है। जबकि वास्तव में जीवन खरबों क्षणों के जोड़ का नाम है। अतः हर क्षण-नया क्षण। और जब हर क्षण नया क्षण है...तो कौन-सा भूतकाल व किसका भविष्य?
-दीप त्रिवेदी
दूसरे का कुछ अच्छा करने से पहले मनुष्य को आत्मिक सुख व अहंकार के सुख का फर्क पता होना जरूरी है। यदि दूसरे के अहंकार के साथ छेड़छाड़ की तो उसके साथ-साथ आप भी बुरी तरह फंस जाएंगे।
-दीप त्रिवेदी
कोई भी शारीरिक प्रतिबंध दो-कौड़ी का है। महत्वपूर्ण वह प्रज्ञा है जिससे आपका मन परिवर्तित हो जाए।
-दीप त्रिवेदी
सफल जीवन वह है, जिसके मन में मृत्यु के समय कोई ‘चाह’ नहीं रह जाती।
-दीप त्रिवेदी