जब तक धर्म, विज्ञान व शिक्षा अपने में Psychology का तड़का नहीं लगा लेते, वे कभी भी मनुष्य के वास्तविक उत्थान हेतु लम्बे समय तक सहायक सिद्ध नहीं हो सकते।
-दीप त्रिवेदी
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जब तक धर्म, विज्ञान व शिक्षा अपने में Psychology का तड़का नहीं लगा लेते, वे कभी भी मनुष्य के वास्तविक उत्थान हेतु लम्बे समय तक सहायक सिद्ध नहीं हो सकते।
-दीप त्रिवेदी
मनुष्य का बचपना तो यह कि जहां सफलता का श्रेय लेने की उसमें होड़ लगी रहती है, वहीं असफलता का मटका किसी और पर फोड़ने की फिराक में भी वह लगा ही रहता है। परिणाम यह कि कभी भी वह घटना का ठीक से आकलन कर नहीं पाता।
-दीप त्रिवेदी
अक्सर अनावश्यक समझदारी हमारे लिए मुसीबत का कारण बन जाती है। फिर भी हम छोटी-से-छोटी व अनावश्यक-से-अनावश्यक वस्तुओं में भी बुद्धि लगाने से बाज नहीं आते।
-दीप त्रिवेदी
वक्त ने ऐसी करवट ली कि संतों और व्यवसायियों की परिभाषा ही परिवर्तित हो गयी। पाखंड के नाम पर लाखों को लूटने वाले व्यवसायी आजकल ‘संत’ बने बैठे हैं। जबकि वास्तविक संत तो वे हैं जो अपनी कर्मठता से व्यवसाय फैलाकर लाखों को रोजगार दिये हुए हैं।
-दीप त्रिवेदी