कोटेशन्स
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हमें न सूरज-चांद उगाने हैं, न गुरुत्वाकर्षण ही सम्भालना है। हमें तो अपने खाये भोजन का खून तक नहीं बनाना है। हमें तो सिर्फ अपने जीवन को आनंद, शांति व सफलता की राह पर लगाना है। क्या यह हास्यास्पद नहीं कि बुद्धिमानी का दावा करने वाले हमसे इतना तक नहीं होता?

-दीप त्रिवेदी

क्या आपको जीवन में प्रकृति के ‘‘अचानक’’ का कभी कोई एहसास नहीं हुआ? गौर करो, आप कुछ याद करने की कोशिश करते हैं - याद नहीं आता; फिर अचानक याद आ जाता है। आप कुछ पाने के हजार प्रयत्न करते हैं पर नहीं पा पाते; ...फिर एक दिन जब उस पाने को भूल भी चुके होते हैं कि अचानक पा लेते हैं।

-दीप त्रिवेदी

जीवन में कोई भी वस्तु सिर्फ अच्छी या सिर्फ बुरी नहीं हो सकती। सूर्य जीवन देता है तो कड़ी धूप भी देता है। पानी प्यास बुझाता है तो बाढ़ लाकर तबाही भी मचाता है। अतः वस्तुओं की अच्छाई पकड़कर अपनाने वाला सुखी होता चला जाता है।

-दीप त्रिवेदी

क्या आप ‘करने’ और ‘होने’ का फर्क जानते हैं? आपको जीवन में जितना करना पड़ रहा है वह आपकी अशक्ति व गुलामी को दर्शाता है, व जितना आप से ‘‘हो रहा है’’ कायदे से तो बस उतना ही आप जी रहे हैं।

-दीप त्रिवेदी

आपके मन में छिपे दुःख, क्रोध, चिंताएं व Frustration वगैरह को सिर्फ ‘‘मन का विज्ञान’’ समझकर ही दूर किया जा सकता है।

-दीप त्रिवेदी

जैसे विज्ञान को किसी वस्तु के रूपांतरण हेतु ‘‘ऊर्जा’’ की आवश्यकता पड़ती है, वैसे ही आपको अपना स्वभाव बदलने हेतु भी ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यदि आप में ऊर्जा नहीं तो चाहकर भी आप अपने में बदलाव नहीं ला सकते हैं।

-दीप त्रिवेदी

‘‘सत्य’’ शारीरिक तौर पर किया कर्म या भावना में बह के किये कर्म का नाम नहीं। सत्य उस कर्म से आये परिणाम का नाम है। किसी ने यदि आपमें सुधार लाने को गाली दी तो उसने गाली दी ही कहां? ...उसने तो आप में सुधार लाने की चेष्टा की।

-दीप त्रिवेदी

जीवन को आगे बढ़ाने का रहस्य सिर्फ आपका ‘मन’ जानता है। मन और बुद्धि का कोई Communication नहीं। अतः जो बातें आपकी बुद्धि को आगे बढ़ने वाली जान पड़े, समझ लेना वह पीछे धकेल देगी; व जो पीछे ले जाने वाली मालूम पड़े, समझ लेना उसी के सहारे आप सफलता के शिखर छू पाएंगे।

-दीप त्रिवेदी

ब्रह्मांड में हर वस्तु का अपना एक स्वभाव है। प्रकृति की किसी भी वस्तु को अपने स्वभाव के बारे में कोई कन्फ्यूजन कभी नहीं होता है। यह मनुष्य ही एक ऐसा बुद्धिमान है जिसे अपने स्वयं के स्वभाव के बारे में कुछ पता नहीं।

-दीप त्रिवेदी

अपना मन जाने बगैर जीवन की कोई सफलता हासिल नहीं की जा सकती। लेकिन मन समझने हेतु ना तो किताबें उपलब्ध हैं ना शिक्षाएं ही। मनुष्य की इतनी असफलता का यही एक कारण है।

-दीप त्रिवेदी

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