कोटेशन्स
विज्ञान

विज्ञान ने Communication, Neccessity, Luxury से लेकर शरीर की बीमारियों के बाबत जो कुछ भी खोजा वह वाकई किसी चमत्कार से कम नहीं। यदि ऐसे में ‘विज्ञान के वरदानों’ का ताल्लुक हम अपनी बुद्धि की जगह मन से बिठा पाएं तो हमारा जीवन देख प्रकृति भी जल उठे।

-दीप त्रिवेदी

भारतीय, सुख-शांति खोजने हेतु जितना ध्यान, पैसा, समय व शक्ति ‘धर्म’ पर खर्चा किये हुए हैं, उतना ही सबकुछ यदि वे विज्ञान की Researches पर लगाना प्रारंभ कर दें तो भारत वाकई सुखी व समृद्ध हो जाए।

-दीप त्रिवेदी

एक समझदार व्यक्ति के लिए सोचने वाली बात यह कि पिछले पांच हजार वर्षों के इतिहास में हुए करोड़ों संत, मौलविओं व पादरियों ने मिलकर जगत का कितना उद्धार किया? और उसके सामने पांच-सौ वैज्ञानिकों ने जगत को क्या दिया? ...हमें सिर्फ यह तय करना है कि मनुष्य के प्रति वास्तविक करुणा से कौन भरा है?

-दीप त्रिवेदी

विज्ञान का मनुष्य के शरीर बाबत सारा ज्ञान Probabilities पर टिका हुआ है। जहां अधिकांश कैन्सर के मरीज तम्बाखू से दूर रहने वाले होते हैं...वहीं अधिकांश अटैक Cholestrol High न होने वालों को आते हैं।

-दीप त्रिवेदी

क्या विज्ञान कभी जीवन पैदा कर पाएगा? नहीं, सवाल ही नहीं उठता। क्योंकि पैदा या नष्ट करने की सत्ता यहां किसी के पास नहीं।

-दीप त्रिवेदी

विज्ञान Physics या Chemistry पुरता भले ही अनेक बातें छाती ठोककर कह सकता है, परंतु ‘‘जीवन’’ बाबत तो वह हमेशा भ्रमित ही रहेगा।

-दीप त्रिवेदी

विज्ञान वस्तुओं की सायकोलोजी के रूपांतरण का नाम है। धर्म मनुष्य की सायकोलोजी को रूपांतरित करनेवाले ज्ञान का नाम है। विज्ञान मनुष्य को भौतिक सुख तो दे सकता है, परंतु मानसिक सुख हेतु तो मनुष्य को अपनी सायकोलोजी रूपांतरित करनी ही रही। अतः दोनों का यथायोग्य समन्वय मनुष्य व संसार दोनों के उत्थान का मार्ग है।

-दीप त्रिवेदी

सम्पूर्ण विज्ञान की पहुंच Time और Space के भीतर है। ...जबकि जगत के सारे रहस्य Time व Space की सीमा के बाहर है। इसलिये कई रहस्य विज्ञान के लिये हमेशा रहस्य ही बने रहेंगे।

-दीप त्रिवेदी

मंदिर-मस्जिद-चर्च न जाने वाले करोड़ों-करोड़ लोग इस विश्व में जी रहे हैं, और हकीकत यह है कि वे ज्यादा चैन व मजे से जी रहे हैं। लेकिन संसार का कोई भी व्यक्ति आज ‘‘विज्ञान’’ के उपयोग के बगैर नहीं जी रहा। जी के देख लें, ‘नर्क’ किसे कहते हैं...पता चल जाएगा।

-दीप त्रिवेदी

विज्ञान अगले लाख वर्ष कोशिश कर ले तो भी Blood Test की तरह हमारे भीतर छिपे ‘‘भावों के Test’’ हेतु कुछ नहीं खोज सकता। क्योंकि यह सायकोलोजी का विषय है, और पदार्थ विज्ञान की पहुंच सायकोलोजी तक कतई नहीं।

-दीप त्रिवेदी

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