जिस रोज आप जहां आपका ‘‘मन’’ हो वहीं शरीर को ले जाने में सक्षम हो जाओगे; वादा करता हूँ, जीवन के सारे गम उसी क्षण छू हो जाएंगे।
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जिस रोज आप जहां आपका ‘‘मन’’ हो वहीं शरीर को ले जाने में सक्षम हो जाओगे; वादा करता हूँ, जीवन के सारे गम उसी क्षण छू हो जाएंगे।
मनुष्य के शरीर बाबत Science के सारे तारण हमेशा 'Ifs and Buts' के सहारे ही रहेंगे। क्योंकि जीवन की अनिश्चितता ही ‘‘कुदरत की लीला’’ है।
यदि जीवन में आप वाकई क्रोध से छुटकारा पाना चाहते हैं तो व्यर्थ की शिक्षाओं को भूल जाओ। क्रोध से छुटकारा पाने का एक ही उपाय है कि जब, जिस पर जितना क्रोध आए उसे निकालते चले जाओ।
‘ताकतवर आदमी’ क्रोध करने को स्वतंत्र होता है, जबकि ‘कमजोर आदमी’ क्रोध दबाने को मजबूर होता है। इसी से ताकतवर प्रसन्न व कमजोर विकृत होता चला जाता है।
मनुष्य जन्म लिया है तो मन के हजारों शौक पालना व पूरे करना अच्छी बात है। यह आपके मन का विकास ही करेगा। परंतु चैतन्य के स्तर पर ‘ध्येय’ बड़ा व एक ही रखना। बुद्ध, जीसस, एडीसन, बिल गेट्स, शेक्सपीयर...सब चैतन्य के स्तर पर ‘एक-लक्षी’ होने के परिणाम हैं।
जन्म एक क्षण है। मृत्यु भी एक क्षण है। इन दोनों के बीच के क्षणों के जोड़ को ही हम जीवन कहते हैं। इस लिहाज से समय वाकई मूल्यवान है। हम अपना समय कहां व किन बातों में गंवा रहे हैं... यह गौर करते ही हमारी सारी समस्याओं का अंत आ सकता है।
जन्म एक क्षण है। मृत्यु भी एक क्षण है। इन दोनों के बीच के क्षणों के जोड़ को ही हम जीवन कहते हैं। इस लिहाज से समय वाकई मूल्यवान है। हम अपना समय कहां व किन बातों में गंवा रहे हैं... यह गौर करते ही हमारी सारी समस्याओं का अंत आ सकता है।
बुरी खबर व अच्छी खबर में फर्क क्या है? नींद तो दोनों ही सुरतों में उड़ जाती है। प्रतिक्रिया तो आप दोनों ही सुरतों में देते हैं। व्यक्ति तो वह जिसे कोई खबर हिला ही न सके।
जिसके बगैर हमारा जीवन चल ही नहीं सकता...जैसे हवा, पानी व गुरुत्वाकर्षण; वह सभी मुफ्त में समान रूप से सबको उपलब्ध है। समझदार के लिये इसके एक नहीं हजार मायने हैं।
प्रकृति से किसी मनुष्य को इतनी सत्ता नहीं कि वह किसी दूसरे मनुष्य के स्थायी सुख का उपाय कर सके। उस हेतु तो हर मनुष्य को स्वयं ही अपने प्रयास करने होते हैं।