यदि आप कोई बड़ा कर्म डूबकर व बिना किसी आकांक्षा के कर सकें, तो मेरा विश्वास कीजिए कि उस एक कर्म से ही आप ‘‘ऐतिहासिक पुरुष’’ हो जाएंगे।
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यदि आप कोई बड़ा कर्म डूबकर व बिना किसी आकांक्षा के कर सकें, तो मेरा विश्वास कीजिए कि उस एक कर्म से ही आप ‘‘ऐतिहासिक पुरुष’’ हो जाएंगे।
यदि आप कोई बड़ा कर्म डूबकर व बिना किसी आकांक्षा के कर सकें, तो मेरा विश्वास कीजिए कि उस एक कर्म से ही आप ‘‘ऐतिहासिक पुरुष’’ हो जाएंगे।
क्या कभी आपने शेर को शिकार करते सिखाने की, या बंदरों को उछलना सिखाने की; या फिर गाय को मांसाहार न खाने की सलाह देने वाली Classes देखी है? तो फिर हमें क्या व क्यों सिखाया जा रहा है? कहीं हमारे धर्मगुरु व शास्त्र हमें जानवरों से भी गये-बीते तो नहीं समझ रहे?
क्या कभी आपने शेर को शिकार करते सिखाने की, या बंदरों को उछलना सिखाने की; या फिर गाय को मांसाहार न खाने की सलाह देने वाली Classes देखी है? तो फिर हमें क्या व क्यों सिखाया जा रहा है? कहीं हमारे धर्मगुरु व शास्त्र हमें जानवरों से भी गये-बीते तो नहीं समझ रहे?
सारे बड़े व महत्वपूर्ण कार्य होते हैं, किये नहीं जा सकते। फिर चाहे वह पृथ्वी का घूमना हो या आपका खाना पचाना। वह चाहे हवाओं का बहना हो या आपका सांस लेना। और चाहे वह कोई मीठी धुन बनाना हो या कोई आविष्कार करना हो।
अक्सर समस्याओं को सुलझाने की कोशिश में आप समस्याओं के निकट पहुंच जाते हैं। प्रायः समस्याएं आती व चली जाती हैं, उसमें आपके करने लायक कुछ नहीं होता है।
अहंकार से बड़ा ‘‘धोखेबाज’’ इस संसार में कोई नहीं। देखना हो तो अच्छे शब्द प्रयोग करनेवालों, सदैव अच्छी बात करनेवालों व मंदिर जानेवालों को देख लेना। अहंकार इन लोगों के सर चढ़कर बोलता है व इनको पता तक नहीं चलता।
विज्ञान की कोई ऐसी खोज नहीं जिसे जैन मुनि अपने शास्त्रों में वर्णित न बताते हों। ज्ञान-विज्ञान से इतने परिपूर्ण शास्त्र होने के बावजूद विज्ञान तो छोड़ो, किसी भी क्षेत्र में एक भी जैन विश्व स्तर पर कुछ किया नहीं दिखता। लगता है अब उन्हें Nobel Prize के लिये अपने शास्त्र भिजवाने प्रारंभ कर देने चाहिए।
ब्रह्मांड में हर वस्तु का अपना एक स्वभाव है। प्रकृति की किसी भी वस्तु को अपने स्वभाव के बारे में कोई कन्फ्यूजन कभी नहीं होता है। यह मनुष्य ही एक ऐसा बुद्धिमान है जिसे अपने स्वयं के स्वभाव के बारे में कुछ पता नहीं।
ब्रह्मांड में हर वस्तु का अपना एक स्वभाव है। प्रकृति की किसी भी वस्तु को अपने स्वभाव के बारे में कोई कन्फ्यूजन कभी नहीं होता है। यह मनुष्य ही एक ऐसा बुद्धिमान है जिसे अपने स्वयं के स्वभाव के बारे में कुछ पता नहीं।