पूरे विश्व में फैले मुस्लिम समुदाय की हालत अजीब हो गयी है। हर आतंकवाद के साथ उनका नाम जोड़ दिया जाता है। निश्चित ही इसका हर्जाना वे भुगत भी रहे हैं। इस हेतु उनका कट्टरता के सामने आवाज न उठा पाना ही प्रमुखता से जवाबदार है।
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पूरे विश्व में फैले मुस्लिम समुदाय की हालत अजीब हो गयी है। हर आतंकवाद के साथ उनका नाम जोड़ दिया जाता है। निश्चित ही इसका हर्जाना वे भुगत भी रहे हैं। इस हेतु उनका कट्टरता के सामने आवाज न उठा पाना ही प्रमुखता से जवाबदार है।
विश्व इतिहास के एकमात्र सम्पूर्ण व्यक्तित्व के मालिक ‘‘कृष्ण’’ को भी जैन शास्त्रों ने नरक में जगह दी है। यहां तक कि पूरा विश्व जिनके तेज से प्रकाशमान है वैसे बुद्ध को भी जैन मुनि ‘‘महावीर’’ से दीक्षित बताते हैं। क्या यह उनकी Insecurity व Inferiority की Height नहीं?
यह नहीं है कि मुस्लिम समुदाय परिवर्तित नहीं हो रहा है, पर उसकी गति अत्यंत धीमी है। वे समझते क्यों नहीं कि विश्व के साथ कदम-से-कदम मिलाए बगैर कोई प्रगति की राह पर आगे नहीं बढ़ सकता।
यह नहीं है कि मुस्लिम समुदाय परिवर्तित नहीं हो रहा है, पर उसकी गति अत्यंत धीमी है। वे समझते क्यों नहीं कि विश्व के साथ कदम-से-कदम मिलाए बगैर कोई प्रगति की राह पर आगे नहीं बढ़ सकता।
अब वक्त आ गया है जब विश्वभर के सारे खुले विचारों वाले बुद्धिमान मुस्लिम अपना एक तगड़ा Association बना लें। यदि वे ही हिम्मत नहीं दिखाते, उन्हें ही अपने भाई-बंधुओं की नहीं पड़ी...तो दूसरा कब तक उनके पीछे प्रयास करेगा?
जैसे आप दूसरों की गलतियों का उसे भुगतते देख उस पर हंस लेते हैं, वैसे ही आप क्यों नहीं अपनी मूर्खताओं का अपने को भुगतते देख हंसते? यह सीख गये तो सारे गम ‘छू’।
जीवन में आत्मा बेचकर कुछ भी पाने से महंगा सौदा और कुछ नहीं हो सकता है।
अच्छा बनने या अच्छा सीखने की आवश्यकता किसी को महसूस नहीं होती, परंतु अच्छा दिखने में कोई रत्तीभर कसर नहीं छोड़ता।
क्या पुनर्जन्म होता है? अवश्य...। लेकिन प्रकृति के इस सिद्धांत पर कि यदि आप हैं ही नहीं तो ‘पैदा’ नहीं किये जा सकते; और आप हैं तो मिटाये नहीं जा सकते।
क्या पुनर्जन्म होता है? अवश्य...। लेकिन प्रकृति के इस सिद्धांत पर कि यदि आप हैं ही नहीं तो ‘पैदा’ नहीं किये जा सकते; और आप हैं तो मिटाये नहीं जा सकते।