क्या पुनर्जन्म होता है? अवश्य...। लेकिन प्रकृति के इस सिद्धांत पर कि यदि आप हैं ही नहीं तो ‘पैदा’ नहीं किये जा सकते; और आप हैं तो मिटाये नहीं जा सकते।
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क्या पुनर्जन्म होता है? अवश्य...। लेकिन प्रकृति के इस सिद्धांत पर कि यदि आप हैं ही नहीं तो ‘पैदा’ नहीं किये जा सकते; और आप हैं तो मिटाये नहीं जा सकते।
क्या पुनर्जन्म होता है? नहीं और बिल्कुल नहीं। वह इस लिहाज से कि जिसे आप अपना होना मान रहे हैं, जैसे आपका नाम, आपका परिवार, आपका देश, समाज, धर्म या आपकी संपत्ति वह सब तो आपकी मृत्यु के साथ निश्चित ही हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।
क्या पुनर्जन्म होता है? नहीं और बिल्कुल नहीं। वह इस लिहाज से कि जिसे आप अपना होना मान रहे हैं, जैसे आपका नाम, आपका परिवार, आपका देश, समाज, धर्म या आपकी संपत्ति वह सब तो आपकी मृत्यु के साथ निश्चित ही हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।
समय के साथ चलने पर ही मनुष्य अपने जीवन की श्रेष्ठ ऊंचाइयां पा सकता है। इस समय के परदे पर कई चीजें पूरी तरह अनावश्यक हैं। उसमें दो प्रमुख हैं; एक पूजा-पाठ व दूसरा अनावश्यक ज्ञान। इन दो के कारण हम समय से बिछड़ जाते हैं व उसके परिणाम हमारी आंखों के सामने है।
यदि आपको बुद्ध, जीसस, कृष्ण या किसी भी बड़े Philosophers की बात को समझना है तो, उनकी कही बातों में दो भेद करने का ज्ञान होना आवश्यक है। एक ‘सनातन-सत्य’ व दूसरा ‘समय का सत्य’। इन दोनों में भेद किये बगैर आप उनकी सारी बातों का उलटा अर्थ ही निकालेंगे।
बाईबल, कुरान व वेद तो कई बार कई मौकों पर गलत साबित हो चुके हैं। यह महत्वपूर्ण मनुष्य जीवन मस्ती से जीते हुए उनके बजाय मनुष्यता पर निछावर करना ज्यादा बेहतर है।
यहां ‘तत्व’ व ‘वस्तु’ की कार्यप्रणाली में कोई फर्क नहीं, आखिर वस्तु भी अस्तित्व में है तो तत्व के कारण ही। (तत्व यानी ‘वह’ जिससे हमारे समेत सबकुछ चलायमान है)
किसी भी वस्तु को प्राप्त करने से पहले ही उस बाबत उत्साहित हो जाना हमेशा जरूरत से ज्यादा दुःखद परिणाम लेकर आता है। विश्वास करने हेतु ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं, अपने ही जीवन की चन्द घटनाओं पर नजर घुमा लें...समझ जाएंगे।
इस ब्रह्मांड में सूर्य, पानी, हवा सब अपने कार्य में तो लगे हैं पर इनको आकांक्षा कोई नहीं। पाना कुछ नहीं। जब हम भी बिना किसी आकांक्षा के कार्यों में व्यस्त होना सीख जाएंगे, तो संतोष के परम-शिखर पर जा बैठेंगे।
जितना आप मन का साथ देंगे उतना ही मन आपका साथ देगा। मन के साथ जबरदस्ती नहीं की जा सकती है। मन के साथ जबरदस्ती करनेवाली शिक्षाओं के कारण ही मनुष्य आज इतना विकृत हो चुका है। मन के साथ सहयोग करनेवाला जीवन में हमेशा बड़ी सफलता पा लेता है।