कोटेशन्स
दीप त्रिवेदी

हम ऐसा तो क्या कर डालने वाले हैं कि इतनी बुद्धि लगाकर जी रहे हैं? सोचो, यदि पृथ्वी क्षण भर भी यह सोचने रुक गयी कि मैं घूमूं या न घूमूं तो क्या होगा? हमारा अस्तित्व न मिट जाएगा?

‘‘द्रष्टा’’ की उपस्थिति का सबसे बड़ा सबूत तो यह है कि कुछ भी गलत करते वक्त दूसरा कोई जाने या न जाने, ऐसा कोई व्यक्ति नहीं जिसे खुद अपने गलत करने का एहसास न होता हो।

हमारे भीतर की आत्मा ही इस जगत की सबसे ज्यादा शक्तिशाली शक्ति है। यह आत्मा ही परमात्मा है। यह सब सुनने-समझने के बावजूद हम मंदिर-मस्जिदों में जाते हैं...तो यह सिवाय स्वयं की आत्मा पर अश्रद्धा के और क्या दर्शाता है?

आज के समय में धन का प्रभाव इतना तो बढ़ गया है कि अब धनवान में अलग से अन्य कोई गुण होने की आवश्यकता ही नहीं रह गयी है।

आज के समय में धन का प्रभाव इतना तो बढ़ गया है कि अब धनवान में अलग से अन्य कोई गुण होने की आवश्यकता ही नहीं रह गयी है।

अहिंसा को उपलब्ध होने के लिए पक्षपात रहित आंख चाहिए। यदि आप अपने समेत सबके साथ न्यायाधीश जैसा व्यवहार कर सकें तो ही आपके जीवन में से हिंसाएं कम होंगी।

ब्रह्मांड की यह विशाल Space कहीं खत्म नहीं होती। सोचो, यदि खत्म हो तो भी उसके आगे क्या होगा? वह भी सिवाय Space के और कुछ नहीं हो सकता। इतने निश्चित Infinite ब्रह्मांड में हम किन-किन बातों की चिंता पाले हुए हैं?

मनुष्य जीवन के लिये सबसे बड़ा अभिशाप भय, झूठी-आशा व निर्भरता है। तथाकथित धार्मिक पांखड के कारण इन तीनों के अलावा आपको और कुछ नहीं मिलता।

मनुष्य जीवन...कुदरत के नियम, उसका अपना स्वभाव, उसकी बुद्धि, मन, हृदय, DNA तथा उसके अपने अनुभवों समेत की सात वस्तुओं से प्रभावित होता है। आठवीं कोई वस्तु या कारण उसे रत्तीभर प्रभावित नहीं करते।

मनुष्य के सारे भयों के पीछे सिर्फ मौत का डर है। जिसने इस पर विजय पा ली उसने समझो भय पर विजय पा ली।

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