क्षणिक-चेतना मनुष्य के मन की वह ऊंचाई है जहां से प्रगति के सारे शिखर तय किये जाते हैं। इसीलिये ज्यादा सोचने वाला जीवन में कभी सफल नहीं हो पाता।
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क्षणिक-चेतना मनुष्य के मन की वह ऊंचाई है जहां से प्रगति के सारे शिखर तय किये जाते हैं। इसीलिये ज्यादा सोचने वाला जीवन में कभी सफल नहीं हो पाता।
क्षणिक-चेतना मनुष्य के मन की वह ऊंचाई है जहां से प्रगति के सारे शिखर तय किये जाते हैं। इसीलिये ज्यादा सोचने वाला जीवन में कभी सफल नहीं हो पाता।
इस ब्रह्मांड में जीवन की कहीं कोई कमी नहीं। कुछ हमारे जैसे तो कई हमसे भिन्न मौजूद हैं। इसे जानने में बाधा ब्रह्मांड की Infinity के साथ-साथ जीवन के विकास की सीमा के कारण भी है।
मनुष्य के प्रेम का कोई जोड़ नहीं। उम्रदराज हुआ बुजुर्ग जब एकान्त में होता है, तब उसको कोई नहीं पूछता। पर उसके बीमार होते ही पचासों अस्पताल पहुंच जाते हैं व मरने पर पांच-सौ एकत्रित हो जाते हैं।
यदि आप धोखेबाज हैं व आपके Visiting Card पर धोखेबाज लिखा है तो आप कैसे किसी को धोखा दे पाएंगे? ...कोई आपके झांसे में आएगा ही नहीं।
मन की गहराइयों का जादू तो यह कि अनपढ़ कालीदास व कबीर, कवियों के ‘‘महा-कवि’’ हो जाते हैं। ...और अशिक्षित एडीसन सबसे ज्यादा आविष्कार करने वाला वैज्ञानिक हो जाता है। क्या अब भी आप समझते हैं कि मन की गहराइयों का विज्ञान समझे बगैर आप सफलता पा लेंगे?
‘आत्मग्लानि’ से बढ़कर मनुष्य का विनाशक कोई नहीं। यह आपके विश्वास से लेकर अस्तित्व तक सबको खत्म कर देता है। फिर भी मन के विज्ञान से पूरी तरह अनजान यह धर्मगुरु सिर्फ अपनी दुकानें चलाने हेतु रोज-रोज मनुष्य को पाप-भाव से भरे जा रहे हैं।
विज्ञान का मनुष्य के शरीर बाबत सारा ज्ञान Probabilities पर टिका हुआ है। जहां अधिकांश कैन्सर के मरीज तम्बाखू से दूर रहने वाले होते हैं...वहीं अधिकांश अटैक Cholestrol High न होने वालों को आते हैं।
विज्ञान का मनुष्य के शरीर बाबत सारा ज्ञान Probabilities पर टिका हुआ है। जहां अधिकांश कैन्सर के मरीज तम्बाखू से दूर रहने वाले होते हैं...वहीं अधिकांश अटैक Cholestrol High न होने वालों को आते हैं।
इस संसार में सच्चे प्रेम से बढ़कर दूसरी कोई ‘‘औषधि’’ नहीं हो सकती।