आपकी गाड़ी ज्यादा कीमती है या आप? निश्चित ही आप। ...फिर गाड़ी की जगह गले में नींबू-मिरची डालकर क्यों नहीं घूमते, खतरा आप पर ज्यादा है।
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आपकी गाड़ी ज्यादा कीमती है या आप? निश्चित ही आप। ...फिर गाड़ी की जगह गले में नींबू-मिरची डालकर क्यों नहीं घूमते, खतरा आप पर ज्यादा है।
नास्तिक और आस्तिक में फर्क क्या है? नास्तिक वह है जो प्रकृति की महासत्ता को पहचानता नहीं; अतः स्वयं की बुद्धि से अर्जित ज्ञान के भरोसे जीवन संवारने में लगा हुआ है। आस्तिक वह है जो बुद्धि लगाता ही नहीं। वह स्वयं को उसके अर्पित कर देता है, प्रकृति उसे जैसा व जो बनाना चाहे बना ले।
नास्तिक और आस्तिक में फर्क क्या है? नास्तिक वह है जो प्रकृति की महासत्ता को पहचानता नहीं; अतः स्वयं की बुद्धि से अर्जित ज्ञान के भरोसे जीवन संवारने में लगा हुआ है। आस्तिक वह है जो बुद्धि लगाता ही नहीं। वह स्वयं को उसके अर्पित कर देता है, प्रकृति उसे जैसा व जो बनाना चाहे बना ले।
नास्तिक और आस्तिक में फर्क क्या है? नास्तिक वह है जो प्रकृति की महासत्ता को पहचानता नहीं; अतः स्वयं की बुद्धि से अर्जित ज्ञान के भरोसे जीवन संवारने में लगा हुआ है। आस्तिक वह है जो बुद्धि लगाता ही नहीं। वह स्वयं को उसके अर्पित कर देता है, प्रकृति उसे जैसा व जो बनाना चाहे बना ले।
ना तो धर्म के नाम पर जागीर बनाने वाले और ना ही धर्म के नाम पर जागीर छोड़ने वाले ‘मोह-रहित’ कहे जा सकते हैं।
मनुष्य-जीवन में कोई Planning करने लायक है तो वह एक ही है कि जब वह जीवन की अंतिम सांसें ले रहा हो तब उसे ना तो कोई Guilt होनी चाहिए और ना ही असंतोष का कोई भाव। ...सबकुछ करने के बाद भी यदि दुनिया से विदा लेते वक्त किसी प्रकार का असंतोष या पश्चाताप हो...तो फिर उसने जीवन में किया क्या?
जीवन सिर्फ वर्तमान है। और उस वर्तमान में न तो भूतकाल की यादें समा सकती है, न भविष्य की चिंताएं। जीवन के सारे दुःखों की जड़ ही इस वर्तमान में भूतकाल या भविष्य को समाने की चेष्टा करने के कारण है।
जीवन सिर्फ वर्तमान है। और उस वर्तमान में न तो भूतकाल की यादें समा सकती है, न भविष्य की चिंताएं। जीवन के सारे दुःखों की जड़ ही इस वर्तमान में भूतकाल या भविष्य को समाने की चेष्टा करने के कारण है।
जीवन सिर्फ वर्तमान है। और उस वर्तमान में न तो भूतकाल की यादें समा सकती है, न भविष्य की चिंताएं। जीवन के सारे दुःखों की जड़ ही इस वर्तमान में भूतकाल या भविष्य को समाने की चेष्टा करने के कारण है।
जीवन सिर्फ वर्तमान है। और उस वर्तमान में न तो भूतकाल की यादें समा सकती है, न भविष्य की चिंताएं। जीवन के सारे दुःखों की जड़ ही इस वर्तमान में भूतकाल या भविष्य को समाने की चेष्टा करने के कारण है।