कई बातें ऐसी होती हैं जो किसी भी समझदार मनुष्य के लिये समझना मुश्किल हो जाती है। ...जैसे अच्छे कर्म करने पर जो सुविधाएं ईश्वर स्वर्ग में प्रदान करता है, उसे यहां करने पर बुरा कहने वाले ये धर्मगुरु कौन होते हैं?
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कई बातें ऐसी होती हैं जो किसी भी समझदार मनुष्य के लिये समझना मुश्किल हो जाती है। ...जैसे अच्छे कर्म करने पर जो सुविधाएं ईश्वर स्वर्ग में प्रदान करता है, उसे यहां करने पर बुरा कहने वाले ये धर्मगुरु कौन होते हैं?
जो भी परिणामकारी ज्ञान है वह मनुष्य के भीतर मन की गहराइयों में ही छिपा पड़ा है। यही कारण है कि मोजार्ट की धुनें हो या उमर खय्याम की रुबाइयां, कृष्ण की भगवद्गीता हो या आईन्स्टाइन का दुनिया बदलकर रख देने वाला सिद्धांत E=mc2; सब भीतर से बाहर निकली चीजें ही हैं।
जो भी परिणामकारी ज्ञान है वह मनुष्य के भीतर मन की गहराइयों में ही छिपा पड़ा है। यही कारण है कि मोजार्ट की धुनें हो या उमर खय्याम की रुबाइयां, कृष्ण की भगवद्गीता हो या आईन्स्टाइन का दुनिया बदलकर रख देने वाला सिद्धांत E=mc2; सब भीतर से बाहर निकली चीजें ही हैं।
इतिहास में ऐसा कोई मनुष्य ज्ञात नहीं जिसके जाने के बाद मनुष्य की प्रगति रुक गयी हो। यानी हमारी चेतना का रोज-रोज विकास हो रहा है। फिर क्यों हम आज भी हजारों वर्ष पूर्व पैदा हुए मनुष्यों के आसरे जी रहे हैं?
इतिहास में ऐसा कोई मनुष्य ज्ञात नहीं जिसके जाने के बाद मनुष्य की प्रगति रुक गयी हो। यानी हमारी चेतना का रोज-रोज विकास हो रहा है। फिर क्यों हम आज भी हजारों वर्ष पूर्व पैदा हुए मनुष्यों के आसरे जी रहे हैं?
यदि तीर्थ-स्थानों की यात्राएं व जात्राएं इतनी ही शुभ होती तो क्यों उस पर जाने वाले हजारों-लाखों लोग हर वर्ष हादसे का शिकार होते हैं? कहीं मनुष्य जन्म के बावजूद उसे परेशान किये जाने पर भगवान अपना क्रोध तो उन पर नहीं निकाल रहे?
जो कट्टर हैं व अपने विरुद्ध नहीं सुन सकते, उन्हें हम आतंकवादी कहते हैं। क्या इनसे मिलते-जुलते लक्षण हमारे अधिकांश धर्मगुरुओं में नहीं? यदि ऐसा न होता तो सुकरात, जीसस व मन्सूर को मारा क्यों जाता?
जो कट्टर हैं व अपने विरुद्ध नहीं सुन सकते, उन्हें हम आतंकवादी कहते हैं। क्या इनसे मिलते-जुलते लक्षण हमारे अधिकांश धर्मगुरुओं में नहीं? यदि ऐसा न होता तो सुकरात, जीसस व मन्सूर को मारा क्यों जाता?
जीवन में जिस किसी सफलता से आपको अहंकार पकड़ ले...समझ लेना कि यह आपके बढ़ने की Limit आ गयी। अब आप यहां से सिर्फ नीचे जा सकते हैं।
हमारा मन अद्भुत शक्तियों से भरा पड़ा है, साथ ही इसमें हजारों विकार भी हैं। चूंकि हम मन के विकारों को नहीं जीत पाते, इसीलिए उसकी अद्भुत शक्तियों से भी वंचित रह जाते हैं।