ध्यान कोई अलग से लगाने या जंगल में जाकर पाने की वस्तु नहीं, हर छोटे-से-छोटा कार्य ध्यान से करने की आदत से ध्यान अपनेआप स्वतः ही बढ़ता चला जाता है।
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ध्यान कोई अलग से लगाने या जंगल में जाकर पाने की वस्तु नहीं, हर छोटे-से-छोटा कार्य ध्यान से करने की आदत से ध्यान अपनेआप स्वतः ही बढ़ता चला जाता है।
महावीर ने वस्त्रों का त्याग किया था। ...फिर यह अधिकांश जैनों के वस्त्रों की दुकान का नाम ‘‘महावीर वस्त्रालय’’ क्यों है?
आप कितनी ‘‘स्वतंत्रता’’ से जी रहे हैं, यह इससे पता चल जाता है कि दूसरों के डर से किस हद तक आपको अपनी इच्छाएं दबानी पड़ रही है।
यदि आप वाकई अपनी भावनाओं से संतुष्ट होंगे तो आपके लिये दूसरों के Certificate कोई मायने नहीं रखेंगे। यहां तक कि सच्चे होने पर आपको सफाई देने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी।
यदि आप वाकई अपनी भावनाओं से संतुष्ट होंगे तो आपके लिये दूसरों के Certificate कोई मायने नहीं रखेंगे। यहां तक कि सच्चे होने पर आपको सफाई देने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी।
भीड़ हर सौ साल में 500 करोड़ की पैदा होती है। चेतनाशील व्यक्ति सौ साल में पांच सौ से ज्यादा पैदा नहीं होते। फैसला आपको करना है कि आपको भीड़ में रहना व मरना है; या फिर अपना अलग व्यक्तित्व पैदा कर हमेशा के लिये इतिहास में अमर हो जाना है।
विज्ञान Physics या Chemistry पुरता भले ही अनेक बातें छाती ठोककर कह सकता है, परंतु ‘‘जीवन’’ बाबत तो वह हमेशा भ्रमित ही रहेगा।
धर्म का कोई ताल्लुक ईश्वर, पूजा-पाठ, मंदिर-मस्जिद या चर्चों से नहीं है; धर्म का सीधा ताल्लुक तो सिर्फ मनुष्य के मन को नयी ऊंचाइयां प्रदान करने वाली शिक्षाओं से है।
जीवन में जो सफल हैं वो इसलिए नहीं कि वे उच्च शिक्षित हैं, बहुत ज्ञानी हैं या कर्मठ होकर कार्य करने वाले हैं। बल्कि उनकी सफलता का रहस्य यह है कि उन्होंने जीवन में सिर्फ अत्यावश्यक ज्ञान व जरूरत पूरती ही शिक्षा ग्रहण की है ...तथा कार्यों में भी वे यथायोग्य चेष्टा ही कर रहे हैं। ऐसा कर वे अपने बहुमूल्य समय व ऊर्जा की बचत करते हैं, और अंत में वही उन्हें सफलता के मार्ग पर लगाने में सहायक सिद्ध होती है।
Complex की जड़ तुलनात्मक शिक्षाओं के कारण मजबूत होती है । दो वस्तुओं या मनुष्यों की तुलना करने से ज्यादा मूर्खतापूर्ण कार्य इस संसार में दूसरा कोई नहीं।