पता नहीं यह धार्मिक लोग और उनकी धार्मिक भावनाएं इतनी तो कितनी कमजोर होती हैं कि बात-बात पर आहत हो जाती हैं। ...वैसे यह बात समझी जा सके वैसी भी है; जरा-सा भूकंप आया नहीं कि कमजोर इमारतें ढ़ही नहीं।
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पता नहीं यह धार्मिक लोग और उनकी धार्मिक भावनाएं इतनी तो कितनी कमजोर होती हैं कि बात-बात पर आहत हो जाती हैं। ...वैसे यह बात समझी जा सके वैसी भी है; जरा-सा भूकंप आया नहीं कि कमजोर इमारतें ढ़ही नहीं।
न शिक्षा, न समाज, न तथाकथित धर्म हमें यह समझा रहे कि जीवन में सरलता, निर्दोषता, स्वार्थहीनता, भोलापन व करुणा इत्यादि का क्या महत्व है। जबकि हकीकत यह है कि संसार की सभी सर्वश्रेष्ठ रचनाएं, सारे आविष्कार व सारी कलाएं ऐसे ‘‘मन’’ वाले व्यक्तियों के जहन से ही निकली है।
न शिक्षा, न समाज, न तथाकथित धर्म हमें यह समझा रहे कि जीवन में सरलता, निर्दोषता, स्वार्थहीनता, भोलापन व करुणा इत्यादि का क्या महत्व है। जबकि हकीकत यह है कि संसार की सभी सर्वश्रेष्ठ रचनाएं, सारे आविष्कार व सारी कलाएं ऐसे ‘‘मन’’ वाले व्यक्तियों के जहन से ही निकली है।
न शिक्षा, न समाज, न तथाकथित धर्म हमें यह समझा रहे कि जीवन में सरलता, निर्दोषता, स्वार्थहीनता, भोलापन व करुणा इत्यादि का क्या महत्व है। जबकि हकीकत यह है कि संसार की सभी सर्वश्रेष्ठ रचनाएं, सारे आविष्कार व सारी कलाएं ऐसे ‘‘मन’’ वाले व्यक्तियों के जहन से ही निकली है।
न शिक्षा, न समाज, न तथाकथित धर्म हमें यह समझा रहे कि जीवन में सरलता, निर्दोषता, स्वार्थहीनता, भोलापन व करुणा इत्यादि का क्या महत्व है। जबकि हकीकत यह है कि संसार की सभी सर्वश्रेष्ठ रचनाएं, सारे आविष्कार व सारी कलाएं ऐसे ‘‘मन’’ वाले व्यक्तियों के जहन से ही निकली है।
मनुष्य की बुद्धिमत्ता ऐसे चुनावों में छिपी है जहां से वह जो भी चाहे या पाये...उससे सिर्फ सुख ही उत्पन्न हो।
सारे श्रेष्ठ Management फिर चाहे वह प्रकृति के हों, मन के व शरीर के हों, या व्यवसाय के हों; "Automation Mode" पर ही परिणामकारी होते हैं। प्रकृति पर तो हमारा बस नहीं चलता, पर बाकी सब जगह तो हम अपनी दखलंदाजी के कारण ही भुगत रहे हैं।
आप सिर्फ हफ्ताभर अपने मन में उठ रही तरंगों, आसपास घट रही घटनाओं व प्रकृति की हलचलों को ध्यान से निहारो। आपको समझ आ जाएगा कि आपकी झूठी आशाओं व आपके खोटे डरों को छोड़कर ‘‘ईश्वर’’ की जरूरत किसी को नहीं।
जीवन में कुछ भी हासिल सिर्फ कार्य करने से किया जा सकता है। ‘‘कार्य’’ बुद्धिमत्तापूर्वक किये कर्म का नाम है। कर्म करने में सक्षम व्यक्ति कभी भाग्य भरोसे नहीं बैठता, क्योंकि वह भाग्य पर विश्वास कर ही नहीं सकता।
जब हमारे साथ घटने वाली छोटी-से-छोटी घटना भी हजारों वर्षों से घट रही लाखों घटनाओं का जोड़ है, तो ऐसे में आप बुद्धि से क्या गणित बिठाने में लगे हुए हैं? जो व्यक्ति इन घट रही घटनाओं के कारण बदलती परिस्थितियों के गणित को समझता है, वह निश्चित ही बिना कुछ किये जब जो चाहिए पा लेता है।