कोटेशन्स
दीप त्रिवेदी

हमारे सारे दुःखों की जड़ में हमारा परिस्थिति के लिये मानसिक तौर पर तैयार न होना है। समझ नहीं आता कि जो दूसरों के साथ घटता है वह आपके साथ भी घट ही सकता है, यह आप मानकर ही क्यों नहीं चलते?

हमारे सारे दुःखों की जड़ में हमारा परिस्थिति के लिये मानसिक तौर पर तैयार न होना है। समझ नहीं आता कि जो दूसरों के साथ घटता है वह आपके साथ भी घट ही सकता है, यह आप मानकर ही क्यों नहीं चलते?

हम अपने को शरीर के तल पर विशिष्ट मानना छोड़ दें, फिर हमारे आधे दुःख स्वतः ही तिरोहित हो जाएंगे। बीमारी से लेकर मृत्यु व Accident से लेकर हादसे; जो दूसरों के साथ घटते हैं वे हमारे व हमारे प्रियजनों के साथ भी घट ही सकते हैं। ...फिर इन सबका दुःख कब तक पालना?

हमें जीवन में सुख-शांति व समृद्धि के लिए ज्ञान नहीं, ऊर्जा चाहिए। ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत ‘‘ध्यान’’ है व उसका सबसे बड़ा शत्रु ‘‘सोचना’’ है।

हमें जीवन में सुख-शांति व समृद्धि के लिए ज्ञान नहीं, ऊर्जा चाहिए। ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत ‘‘ध्यान’’ है व उसका सबसे बड़ा शत्रु ‘‘सोचना’’ है।

धार्मिक व्यक्ति चीजों को सलीके से अपनाना जानता है; अधार्मिक मारे ‘‘डर’’ के वस्तुओं का ही त्याग करता फिरता है।

हिंदू धर्म की बात करूं तो उनके सभी भगवान राजा व क्षत्रिय हैं। ...फिर धर्म का ठेका इन पंडितों व संन्यासियों के पास कब और कैसे चला गया?

आप मन और जीवन समझना चाहते हैं, तो वह धर्म या विद्यालय नहीं सिखा पाएंगे। उस हेतु तो आपको अपने चारों तरफ घट रही प्राकृतिक घटनाओं को ध्यान से देखना पड़ेगा।

आप मन और जीवन समझना चाहते हैं, तो वह धर्म या विद्यालय नहीं सिखा पाएंगे। उस हेतु तो आपको अपने चारों तरफ घट रही प्राकृतिक घटनाओं को ध्यान से देखना पड़ेगा।

हिंदू धर्म की बात की जाए तो उनके अधिकांश अवतार संसारी हैं। ...फिर यह संन्यासी कैसे धार्मिक हो गये?

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