जीवन में कोई भी मनुष्य सिर्फ बुरा नहीं हो सकता। बुरे-से-बुरे मनुष्य में भी हजार अच्छाइयां तो छिपी ही रहती हैं। मनुष्यों की सिर्फ अच्छाइयों को देखनेवाला परम शांति से जीता चला जाता है।
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जीवन में कोई भी मनुष्य सिर्फ बुरा नहीं हो सकता। बुरे-से-बुरे मनुष्य में भी हजार अच्छाइयां तो छिपी ही रहती हैं। मनुष्यों की सिर्फ अच्छाइयों को देखनेवाला परम शांति से जीता चला जाता है।
‘‘सत्य’’ शारीरिक तौर पर किया कर्म या भावना में बह के किये कर्म का नाम नहीं। सत्य उस कर्म से आये परिणाम का नाम है। किसी ने यदि आपमें सुधार लाने को गाली दी तो उसने गाली दी ही कहां? ...उसने तो आप में सुधार लाने की चेष्टा की।
जैसे शारीरिक बीमारियां होने पर कड़वी दवाइयां पिलायी जाती है, वैसे ही मानसिक बीमारी होने पर कड़ा व्यवहार भी करना ही पड़ता है। यही कारण है कि सिर्फ मीठा व अच्छा बोलनेवाले हमारे जीवन के लिये बड़े घातक सिद्ध होते हैं।
जीवन को गौर से देखने पर पाओगे कि यहां के हर सुख के साथ दुःख... व हर दुःख के साथ सुख जुड़ा ही हुआ है। अतः जो कुछ भी घट रहा है उसमें अपनी निगाह सिर्फ सुख पर बनाये रखने से ही आप सदैव सुखी हो सकते हैं।
जीवन को गौर से देखने पर पाओगे कि यहां के हर सुख के साथ दुःख... व हर दुःख के साथ सुख जुड़ा ही हुआ है। अतः जो कुछ भी घट रहा है उसमें अपनी निगाह सिर्फ सुख पर बनाये रखने से ही आप सदैव सुखी हो सकते हैं।
यदि सर पे टीका लगाने, हाथ में धागा पहनने या पांच वक्त की नमाज पढ़ने या मंदिर, मस्जिद, चर्च हो आने से विश्व की सबसे बड़ी ऊंचाई ‘‘धर्म’’ हासिल हो जाती हो, तो-तो धर्म से सस्ता कुछ नहीं।
धार्मिक शास्त्र हजारों वर्ष पुराने हैं। वे जाने कबसे मनुष्य के उद्धार में लगे पड़े हैं। फिर भी मनुष्य के दुःख-दर्दों को देखते हुए वे पूरी तरह असफल सिद्ध हुए हैं। अब समय आ गया है...जब नये विचारों को अपनाया जाए।
धार्मिक शास्त्र हजारों वर्ष पुराने हैं। वे जाने कबसे मनुष्य के उद्धार में लगे पड़े हैं। फिर भी मनुष्य के दुःख-दर्दों को देखते हुए वे पूरी तरह असफल सिद्ध हुए हैं। अब समय आ गया है...जब नये विचारों को अपनाया जाए।
हम होशियारी किसे कहते हैं? जरूरत से ज्यादा Apply करने को। जरूरत से ज्यादा Apply करने की आवश्यकता क्या है? वह तो अपने-आप में मूर्खता का ही एक स्वरूप हुआ।
अपने शास्त्रों को विज्ञान से ज्यादा जाननेवाले व Advance बतानेवाले ये जैन मुनि नंगे पांव चल व सर के बाल अपने हाथों से नोंच...जगत को अपने शास्त्रों में वर्णित कौन से वैज्ञानिक युग में ले जाना चाह रहे हैं?