हमारे मन की गहराइयां सूर्य की तरह सदैव प्रकाशमान है। हमने बुद्धि का साया डालकर उसपर ग्रहण लगा रखा है।
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हमारे मन की गहराइयां सूर्य की तरह सदैव प्रकाशमान है। हमने बुद्धि का साया डालकर उसपर ग्रहण लगा रखा है।
शक्तिशाली व सकारात्मक विचार वालों से मिलो तो आप तत्काल ऊर्जा से भर जाते हैं। नकारात्मक विचार के व्यक्ति से मिलते ही हमारी शक्ति क्षीण हो जाती है। ...सोचो, जो खुद नकारात्मक हो, उसका क्या हाल होता होगा?
शक्तिशाली व सकारात्मक विचार वालों से मिलो तो आप तत्काल ऊर्जा से भर जाते हैं। नकारात्मक विचार के व्यक्ति से मिलते ही हमारी शक्ति क्षीण हो जाती है। ...सोचो, जो खुद नकारात्मक हो, उसका क्या हाल होता होगा?
आप धार्मिक तल पर कितने गहरे हैं इसका अनुमान इस बात से लग जाता है कि आपको अपने जीवन हेतु और कितने आश्वासनोंें व आशीर्वादों की जरूरत है।
हम रात को ही सो रहे हैं, ऐसा नहीं है। हमारी दिन की नींद तो उससे भी कहीं गहरी है। हम बमुश्किल कभी-कभार क्षणभर को जागते हैं। जागने का अर्थ है आपके मन, शरीर, बुद्धि द्वारा कार्य आपके निर्देश पर हो रहे हैं।
इस विश्व की सबसे बड़ी समस्या वे पांच करोड़ के करीब पंडित, मौलवी, पादरी, मठाधीश या अन्य धर्म के साधु हैं जो धर्म के नाम पर बिना कुछ किये दूसरों के भरोसे जी रहे हैं। यदि उनसे जबरन खेती भी करवा ली जाए तो मैं वादा करता हूँ कि पूरे विश्व में अनाज के भाव रातों-रात आधे हो जाएंगे।
अपनी ही बात को सच्चा मान उसका दृढतापूर्वक साथ तो आप सदियों से देते आ रहे हैं। लेकिन यह क्यों नहीं समझते कि यथायोग्य आलोचना सहे बगैर वक्त के अनुसार राह नहीं पायी जा सकती। मनुष्य की चेतना का यह नियम है कि जो जितना अपने खिलाफ सुनने को तैयार रहता है, उतना ही वह निखरता चला जाता है। अपनी ही कट्टरता के कारण विश्वभर के मुसलमान भाई ‘‘बुद्धिमानों’’ की इस अपार करुणा से करीब-करीब वंचित हैं।
अपनी ही बात को सच्चा मान उसका दृढतापूर्वक साथ तो आप सदियों से देते आ रहे हैं। लेकिन यह क्यों नहीं समझते कि यथायोग्य आलोचना सहे बगैर वक्त के अनुसार राह नहीं पायी जा सकती। मनुष्य की चेतना का यह नियम है कि जो जितना अपने खिलाफ सुनने को तैयार रहता है, उतना ही वह निखरता चला जाता है। अपनी ही कट्टरता के कारण विश्वभर के मुसलमान भाई ‘‘बुद्धिमानों’’ की इस अपार करुणा से करीब-करीब वंचित हैं।
जीवन में जो भी प्रयत्न कर पाया जाएगा वह कभी भी सुख नहीं देगा। क्योंकि दुःख की शुरुआत तो प्रयत्न करने से ही शुरू हो जाती है। जबकि जो कार्य आपसे आनंदपूर्वक होते हैं व होते चले जाते हैं, उससे आप जो भी हासिल करेंगे वे हमेशा ही परिणामकारी व सुखदायी होंगे।
जीवन में जो भी प्रयत्न कर पाया जाएगा वह कभी भी सुख नहीं देगा। क्योंकि दुःख की शुरुआत तो प्रयत्न करने से ही शुरू हो जाती है। जबकि जो कार्य आपसे आनंदपूर्वक होते हैं व होते चले जाते हैं, उससे आप जो भी हासिल करेंगे वे हमेशा ही परिणामकारी व सुखदायी होंगे।