ईश्वर पर भरोसा करने वाला मैं उसे मानता हूँ जो चाहे जो घट जाए... उसे ईश्वर की मरजी मानकर उसी क्षण हंसते-हंसते स्वीकारने की क्षमता रखता हो।
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ईश्वर पर भरोसा करने वाला मैं उसे मानता हूँ जो चाहे जो घट जाए... उसे ईश्वर की मरजी मानकर उसी क्षण हंसते-हंसते स्वीकारने की क्षमता रखता हो।
ईश्वर पर भरोसा करने वाला मैं उसे मानता हूँ जो चाहे जो घट जाए... उसे ईश्वर की मरजी मानकर उसी क्षण हंसते-हंसते स्वीकारने की क्षमता रखता हो।
कितनी ही बड़ी समस्या से आप क्यों न घिरे हों, पर उसे सुलझाने हेतु ‘चिंतन’ व ‘चिंता’ का फर्क मालूम होना आवश्यक है। उसका चिंतन करने से समस्या कितनी ही जटिल क्यों न हो, वह जल्द ही सुलझ जाती है; जबकि समस्या की चिंता करने से समस्या आपको खा जाती है।
कितनी ही बड़ी समस्या से आप क्यों न घिरे हों, पर उसे सुलझाने हेतु ‘चिंतन’ व ‘चिंता’ का फर्क मालूम होना आवश्यक है। उसका चिंतन करने से समस्या कितनी ही जटिल क्यों न हो, वह जल्द ही सुलझ जाती है; जबकि समस्या की चिंता करने से समस्या आपको खा जाती है।
कितनी ही बड़ी समस्या से आप क्यों न घिरे हों, पर उसे सुलझाने हेतु ‘चिंतन’ व ‘चिंता’ का फर्क मालूम होना आवश्यक है। उसका चिंतन करने से समस्या कितनी ही जटिल क्यों न हो, वह जल्द ही सुलझ जाती है; जबकि समस्या की चिंता करने से समस्या आपको खा जाती है।
जो घड़ी के साथ पांच वक्त की नमाज पढ़ेगा वह ‘‘एडीसन’’ कब और कैसे हो पाएगा?
क्रोध, चिंता, भय, पूजा, असुरक्षा, ईर्ष्या, पक्षपात आपको मन के उन विकारों में ले जाते हैं, जहां से आपको अंधा भी आंख वाला नजर आने लगता है। अब जब आपको किसी चीज की पहचान ही नहीं रही तो सिवाय असफलता के जीवन में क्या मिल सकता है?
जब कयामत के दिन सारे फैसले हो ही जाने वाले हैं, तो फिर आज बंदूक उठाकर व निर्दोषों की हत्या कर ये आतंकवादी कौन-सा फैसला करने में लगे हुए हैं?
मेहरबानी कर पुरानी व गलत शिक्षाओं के जाल में न पड़ें। यह स्पष्ट समझ लें कि मन के तल पर कोई भी भाव दबाने के सिर्फ दुष्परिणाम आते हैं।
दिल से ‘‘सच्चा-व्यक्ति’’ बिछड़ने के तमाम गमों से हमेशा आजाद रहता है। क्योंकि वह जानता है कि शरीर से मिलना-बिछड़ना कुदरत की बनायी परिस्थितियों पर निर्भर है, सो उसका दुःख क्या पालना? और किसी से मन से भी बिछड़ गए तब तो उसका दुःख पालने का वैसे ही सवाल नहीं उठता।