बच्चे की बुद्धि में अच्छा-बुुरा, मेरा-तेरा या पाप-पुण्य नहीं होता। इन सबकी उसपर कंडीशनिंग की जाती है। वैसे ही बच्चे का Liver तीखा या तेल वाला नहीं खा सकता, उसे भी Trained ही करना पड़ता है।
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बच्चे की बुद्धि में अच्छा-बुुरा, मेरा-तेरा या पाप-पुण्य नहीं होता। इन सबकी उसपर कंडीशनिंग की जाती है। वैसे ही बच्चे का Liver तीखा या तेल वाला नहीं खा सकता, उसे भी Trained ही करना पड़ता है।
प्रेम और क्रोध एक ही ऊर्जा के दो नाम हैं। एक का ठीक तरीके से उपयोग करना सीख जाओ...दूसरे की ऊर्जा स्वतः ही परिणामकारी कर्मों में लग जाएगी।
प्रेम और क्रोध एक ही ऊर्जा के दो नाम हैं। एक का ठीक तरीके से उपयोग करना सीख जाओ...दूसरे की ऊर्जा स्वतः ही परिणामकारी कर्मों में लग जाएगी।
प्रेम और क्रोध एक ही ऊर्जा के दो नाम हैं। एक का ठीक तरीके से उपयोग करना सीख जाओ...दूसरे की ऊर्जा स्वतः ही परिणामकारी कर्मों में लग जाएगी।
‘मन’ ना सिर्फ प्रकृति के सारे रहस्यों को समझने वाला है, बल्कि उसके प्रभाव को घड़ी के कांटे के साथ विश्व के किसी भी मनुष्य के जीवन में क्या घट सकता है...बताने में भी सक्षम है। ...फिर समझ नहीं आता कि हम हमारे मन में डुबकी लगाने की बजाय किन-किन कार्यों में उलझे पड़े हैं?
निश्चित ही आत्मतृप्ति से बड़ा सुख इस विश्व में कोई नहीं। ...पर आत्मतृप्ति का अनुभव आता ही दूसरों का भला करने से है।
हमें फैसला यह करना है कि मंदिर-मस्जिद-चर्च जाना ज्यादा महत्वपूर्ण है कि मन के विकार दूर करना?
जीवन को राह दिखाने हेतु अक्सर ‘शत्रु’...मित्रों से कहीं ज्यादा कारगर सिद्ध होते हैं। उनके कारण ना सिर्फ आपकी सतर्कता बनी रहती है, बल्कि प्रायः वे आपका उत्साह बढ़ाने वाले भी सिद्ध होते हैं। ...ऐसे में इस संसार में नफरत को जगह ही कहां?
हमें समझना यह है कि जीवन को बढ़ाने के लिये डिग्रियां ज्यादा सहायक है कि Concentration। बुद्ध से लेकर एडीसन तक को देखने पर तो Concentrationही ज्यादा महत्वपूर्ण दिखाई दे रहा है।
आप एक क्षण को जागकर ध्यान से ब्रह्मांड की विशालता या समुद्र की गहराई को देख लेना, आपके सारे दुःख तिरोहित हो जाएंगे; क्योंकि फिर आपको अपने कुछ ‘‘बड़े’’ या ‘‘विशिष्ट’’ होने का गुमान बचेगा ही नहीं।