आप मन से कितने ‘जागरुक’ हैं इस बात का पता इससे चलता है कि आप किस बात पर क्या प्रतिक्रिया देंगे, यह कितनों को मालूम पड़ता है? जागरुक व्यक्ति की सारी प्रतिक्रियाएं आप हमेशा अप्रत्याशित ही पाएंगे।
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आप मन से कितने ‘जागरुक’ हैं इस बात का पता इससे चलता है कि आप किस बात पर क्या प्रतिक्रिया देंगे, यह कितनों को मालूम पड़ता है? जागरुक व्यक्ति की सारी प्रतिक्रियाएं आप हमेशा अप्रत्याशित ही पाएंगे।
बच्चों को मां-बाप द्वारा सुनायी जाने वाली हजार शिक्षाप्रद कहानियों में राम व श्रवण जैसे आज्ञाकारी बच्चों की कहानियां अक्सर कुछ ज्यादा ही चाव से सुनायी जाती है। कहीं उनमें से कुछ अपने बच्चों की जवानियां खुदके बुढ़ापे पर निछावर करने की छिपी तमन्ना लिए तो नहीं बैठे हैं?
छोटा समुदाय कट्टरता दिखाता है तो समझ में आता है। उनकी Insecurity व Inferiority समझी जा सके, वैसी होती है। पर इतना बड़ा मुस्लिम समुदाय खुले विचारों के साथ खड़ा न होकर अपना नुकसान स्वयं कर रहा है।
सत्य सदैव से है व रहेगा। क्योंकि सत्य विश्व की सारी विरोधाभासी शक्तियों व भावों के बीच के सेतु का नाम है। शक्तियां व भावों में दोनों ओर कितने ही उतार-चढ़ाव आ जाएं, सत्य स्थिर ही रहता है।
धन की दौड़ से विज्ञान भी अछूता नहीं। पिछले दो-सौ वर्षों की सारी व्यावसायिक सफलताएं विज्ञान की नयी-नयी खोजों को ही आभारी हैं।
जैसे कइयों की उम्र के साथ बुद्धि चलना बंद हो जाती है, वैसे ही उम्र के साथ कइयों का Liver भी जवाब दे ही जाता है। फिर उन्हें सादा खाकर ही जीना पड़ता है। यहां सवाल यह कि जो भरी जवानी में सादा खा रहे हैं उनका क्या? कुछ नहीं, कमजोर Liver उन्हें रोज की पचासों बीमारियां पकड़ा ही देता है।
यदि आपको मुहूर्त देखने व राशि मिलाने पर इतना ही भरोसा है तो घर में किसी को ऍटैक आने पर उसे तुरंत अस्पताल क्यों ले जाते हैं? क्यों नहीं पहले मुहूर्त निकलवाकर ही उन्हें घर से निकालते, व Doctor से भी राशि मिलाने के बाद ही उनका Operation करवाते?
प्रतिकूल परिस्थितियां आपको तभी तक परेशान करती हैं जब तक आप उसपर ध्यान देते हैं। ध्यान अन्य अनुकूल परिस्थिति पर लगाते ही कष्ट छू हो जाते हैं।
जीवन में कोई भी वस्तु सिर्फ अच्छी या सिर्फ बुरी नहीं हो सकती। सूर्य जीवन देता है तो कड़ी धूप भी देता है। पानी प्यास बुझाता है तो बाढ़ लाकर तबाही भी मचाता है। अतः वस्तुओं की अच्छाई पकड़कर अपनाने वाला सुखी होता चला जाता है।
समय सिर्फ घाव देता है ऐसा नहीं है। समय बड़े-से-बड़े घाव भर भी देता है। सबूत के तौर पर कितना ही बड़ा सदमा क्यों न हो...समय के साथ मनुष्य सम्भल ही जाता है।