इस संसार में ‘जो’ हर घटनेवाली अच्छी-बुरी घटना से सीखने की कला जानता है, व पूरे सब्र के साथ घटनेवाली घटना के अंतिम परिणाम का इन्तजार कर सकता है; ‘वह’ जल्द ही जान जाता है कि यहां बुरा कुछ हो ही नहीं सकता।
Copyright © 2012. ---
इस संसार में ‘जो’ हर घटनेवाली अच्छी-बुरी घटना से सीखने की कला जानता है, व पूरे सब्र के साथ घटनेवाली घटना के अंतिम परिणाम का इन्तजार कर सकता है; ‘वह’ जल्द ही जान जाता है कि यहां बुरा कुछ हो ही नहीं सकता।
आप मेरा विश्वास करें कि ‘आप’ अपने समेत सबके जीवन के उतार-चढ़ावों को सिर्फ देखने वाले हैं। आपकी दिक्कत यह है कि आप अपने को करने वाला मानते हैं।
हम कितने कमाल हैं? हमारे पास शेर जैसे पंजे नहीं फिर भी सबको काटने दौड़ते हैं। सांप जैसा जहर नहीं, फिर भी खुन्नसें पालते रहते हैं। पक्षी जैसे पंख नहीं फिर भी कल्पना लोक में उड़ते ही रहते हैं। जब आपमें इन्सानों के कोई गुण ही नहीं तो जीवन में सफलता कैसे पाओगे?
हम कितने कमाल हैं? हमारे पास शेर जैसे पंजे नहीं फिर भी सबको काटने दौड़ते हैं। सांप जैसा जहर नहीं, फिर भी खुन्नसें पालते रहते हैं। पक्षी जैसे पंख नहीं फिर भी कल्पना लोक में उड़ते ही रहते हैं। जब आपमें इन्सानों के कोई गुण ही नहीं तो जीवन में सफलता कैसे पाओगे?
हमारी असफलता का सबसे बड़ा कारण यह है कि हम इस जगत की संयुक्तता को नहीं देखते। यहां ना तो किसी का जाती और ना ही किसी समूह-विशेष का हित साध पाना संभव है।
Concentration एक जादू है, क्योंकि Concentration में ऊर्जा सरक्युलर घूमती है। दूसरी तरफ पूरे ब्रह्मांड की ऊर्जा भी सरक्युलर घूमती है। इसीलिये Concentration में हमारी प्रकृति से ट्युनिंग बैठ जाती है। और एक बार प्रकृति से Tuning बैठ गयी फिर जीवन सुख और समृद्धि से भरा ही समझो। अतः यदि बड़ी सफलता पानी हो तो हर छोटे-से छोटा कार्य ध्यान से करना सीखना ही होगा।
Concentration एक जादू है, क्योंकि Concentration में ऊर्जा सरक्युलर घूमती है। दूसरी तरफ पूरे ब्रह्मांड की ऊर्जा भी सरक्युलर घूमती है। इसीलिये Concentration में हमारी प्रकृति से ट्युनिंग बैठ जाती है। और एक बार प्रकृति से Tuning बैठ गयी फिर जीवन सुख और समृद्धि से भरा ही समझो। अतः यदि बड़ी सफलता पानी हो तो हर छोटे-से छोटा कार्य ध्यान से करना सीखना ही होगा।
इस ब्रह्मांड में एक कण-मात्र भी न तो पैदा किया जा सकता है, ना ही उसे मिटाया जा सकता है। कुछ अंश तक उसका रूपांतरण किया जा सकता है...व कुछ उसका रूपांतरण अपने आप हो रहा है।
"Third Force" ना सिर्फ भूकंप, बारिश या गुरुत्वाकर्षण को प्रभावित किये हुए है, बल्कि यह बराबरी पर हमारे मन, शरीर व समाज को भी प्रभावित कर ही रही है। ...हालांकि यह समझी जा सके वैसी है; क्योंकि यह नियमों के तहत ही क्रियाशील है।
‘‘कर्मवाद’’ व ‘‘भाग्यवाद’’ दो समानांतर लकीरें हैं...जो न मिली हैं - ना कभी मिल सकती हैं।