यह जगत "Three Dimensions Theory" से अस्तित्व में है। हमारे समेत इस जगत का कण-कण सिर्फ इसी Theory से चलायमान है। हर वस्तु व घटना के तीनों Dimensions को समझना मनुष्य के बुद्धिमत्ता की सबसे बड़ी ऊंचाई है।
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यह जगत "Three Dimensions Theory" से अस्तित्व में है। हमारे समेत इस जगत का कण-कण सिर्फ इसी Theory से चलायमान है। हर वस्तु व घटना के तीनों Dimensions को समझना मनुष्य के बुद्धिमत्ता की सबसे बड़ी ऊंचाई है।
जितना ज्ञान हमारे मन की गहराइयों में छिपा पड़ा है... उससे रत्तीभर ज्यादा ज्ञान बाहर के जगत में नहीं। हां, जानकारियों की Update अवश्य हमें बाहर के जगत से लेनी पड़ती है। ...यहां ‘ज्ञान’ व ‘जानकारी’ का फर्क समझने लायक है।
समझ नहीं आता लोग-बाग साल भर ऐसे काम क्यों करते रहते हैं कि ङ्गिर हर वर्ष ‘‘मिच्छामि दुक्कड़म्’’ कहकर उन्हें सबसे क्षमा मांगनी पड़ती है।
विज्ञान ने Communication, Neccessity, Luxury से लेकर शरीर की बीमारियों के बाबत जो कुछ भी खोजा वह वाकई किसी चमत्कार से कम नहीं। यदि ऐसे में ‘विज्ञान के वरदानों’ का ताल्लुक हम अपनी बुद्धि की जगह मन से बिठा पाएं तो हमारा जीवन देख प्रकृति भी जल उठे।
क्या आपने कभी गौर किया कि मन के भीतर से जो कुछ भी आ रहा है, उसे रोकने में ही हम अपनी सर्वाधिक शक्ति का नाश कर देते हैं?
जब हम अपना जीवन लाखों मनुष्यों द्वारा बनाई वस्तुओं के भरोसे गुजारते हैं, तो क्या यह हमारा कर्तव्य नहीं कि मृत्यु से पहले हम कोई ऐसा कार्य कर जाएं जिससे आनेवाले लाखों मनुष्यों का जीवन सुख, शांति, आनंद और समृद्धि से भर जाए?
आप जीवन को कितनी गहराई से समझ रहे हैं इस बात का अंदाजा इससे लग जाता है कि आप अपने साथ घटने वाली अच्छी-बुरी घटना से कितनी जल्दी बाहर निकल आते हैं।
तुम्हारा वही है जो तुमसे मरने के बाद भी न बिछड़े; और वह सिवाय तुम्हारे ‘‘आत्म-संतोष’’ के और कुछ नहीं हो सकता है।
जीवन में प्रसन्न रहने के लिये चैन के दो निवाले, गिरती बारिश या बहती हवायें ही पर्याप्त हैं। ...जबकि दुःख के कारणों पर तो हजारों किताबें लिखी जा सकती हैं।
जन्म असत्य है। मृत्यु भी असत्य है। सत्य तो जीवन के इन दो विरोधाभासी छोरों को मिलाने वाला तत्व है। जिस रोज आप उसे पहचान लेंगे उस दिन के बाद आप जब, जो और जितना चाहेंगे...मिलेगा।